हैदराबाद। दिल्ली आबकारी नीति मामले में जमानत पर बाहर आईं भारत राष्ट्र समिति (BRS) की कद्दावर नेता और पूर्व एमएलसी कलवाकुंतला कविता (K. Kavitha) एक बार फिर बड़े सियासी विवादों के केंद्र में हैं। चुनाव आयोग (ECI) ने के. कविता द्वारा प्रस्तावित उनकी नई राजनीतिक पार्टी के संक्षिप्त नाम ‘TRS’ के इस्तेमाल को लेकर उन्हें एक आधिकारिक कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
आयोग ने यह कदम किसी एक या दो नहीं, बल्कि 1,100 से अधिक लिखित शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए उठाया है। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कविता जानबूझकर इस नाम का इस्तेमाल कर तेलंगाना के मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं।
बैकग्राउंड: ‘तेलंगाना राष्ट्र समिति’ से ‘रक्षणा सेना’ तक का सफर
गौरतलब है कि के. कविता के पिता और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने साल 2001 में अलग राज्य के आंदोलन के लिए ‘तेलंगाना राष्ट्र समिति’ (TRS) का गठन किया था। साल 2022 में इसका नाम बदलकर ‘भारत राष्ट्र समिति’ (BRS) कर दिया गया।
- कविता की चाल: के. कविता ने अपनी नई पार्टी के लिए पहले इसी ऐतिहासिक नाम ‘तेलंगाना राष्ट्र समिति’ (TRS) को दोबारा पंजीकृत कराने का प्रयास किया था।
- चुनाव आयोग का वीटो: केंद्रीय चुनाव आयोग ने इस पर तुरंत आपत्ति जताई और कहा कि एक स्थापित राजनीतिक पहचान से मिलता-जुलता नाम रखने से चुनाव के दौरान मतदाताओं में भारी भ्रम पैदा होगा।
- नया दांव: आयोग के कड़े रुख के बाद कविता ने चतुराई दिखाते हुए पार्टी का पूरा नाम बदलकर ‘तेलंगाना रक्षणा सेना’ कर दिया, लेकिन इसके संक्षिप्त रूप (Acronym) को ‘TRS’ ही बनाए रखा।
1100 से ज्यादा शिकायतें; बीआरएस (BRS) ने भी खोला मोर्चा
पार्टी के शॉर्ट फॉर्म ‘TRS’ को न बदलने की जिद ने इस नए विवाद को जन्म दिया है। सूत्रों के मुताबिक, केसीआर की पार्टी बीआरएस (BRS) के कार्यकर्ताओं, कई सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने चुनाव आयोग को पत्रों की बाढ़ ला दी।
शिकायतकर्ताओं का तर्क: “तेलंगाना की जनता के मानस पटल पर ‘TRS’ शब्द का गहरा राजनीतिक प्रभाव है। किसी नई पार्टी को इस शॉर्ट फॉर्म का इस्तेमाल करने की अनुमति देना चुनावी निष्पक्षता के खिलाफ होगा, क्योंकि आम जनता इसे पुरानी टीआरएस ही समझेगी।”
आर-पार के मूड में कविता: कानूनी लड़ाई की तैयारी
चुनाव आयोग ने के. कविता को तय समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कविता इस नोटिस से बेहद असहज हैं और बैकफुट पर जाने के मूड में नहीं हैं।
- कविता का तर्क: उनका रुख है कि जब उन्होंने पार्टी का पूरा नाम (तेलंगाना रक्षणा सेना) पूरी तरह बदल दिया है, तो केवल तीन अक्षरों के संक्षिप्त रूप ‘TRS’ पर आपत्ति जताना तार्किक नहीं है।
- कोर्ट जाने के संकेत: सूत्रों का कहना है कि अगर चुनाव आयोग ‘TRS’ संक्षिप्त नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाता है, तो कविता इसके खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती हैं।



