तिरुवनंतपुरम: केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने वायनाड टनल परियोजना को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्होंने इस परियोजना का विरोध विकास के खिलाफ नहीं, बल्कि पर्यावरणीय प्रभावों के उचित अध्ययन की मांग को लेकर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने उन्हें “विकास विरोधी” करार दिया था।
मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि किसी भी बड़ी आधारभूत संरचना परियोजना को लागू करने से पहले उसके पर्यावरणीय प्रभावों का वैज्ञानिक और विस्तृत मूल्यांकन किया जाना बेहद आवश्यक है। उनका कहना था कि पश्चिमी घाट जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में बिना समुचित अध्ययन के किसी भी बड़े निर्माण कार्य को आगे बढ़ाना भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियां पैदा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि उनका विरोध केवल इस बात को लेकर था कि सरकार पहले पर्यावरणीय अध्ययन कराए और उसके बाद ही परियोजना पर अंतिम फैसला ले। लेकिन उस समय उनकी इस मांग को नजरअंदाज करते हुए उन्हें विकास विरोधी बताकर राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया।
सतीशन ने दोहराया कि उनकी सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास परियोजनाएं जरूरी हैं, लेकिन उन्हें पर्यावरण सुरक्षा और स्थानीय लोगों के हितों से समझौता किए बिना आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
वायनाड टनल परियोजना लंबे समय से केरल की प्रमुख आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल रही है। समर्थकों का मानना है कि इससे यात्रा का समय कम होगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी, जबकि पर्यावरणविद लगातार पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक संतुलन पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताते रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री सतीशन का यह बयान परियोजना को लेकर चल रही राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस को एक बार फिर तेज कर सकता है।





