मेरठ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस हिरासत में एक प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में घमासान मच गया है। इस पूरे विवाद पर अब मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।
एसएसपी अविनाश पांडे ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए दावा किया है कि इस पूरे मामले में “परिवार के सदस्यों को जानबूझकर उत्तेजित (भड़काया) किया जा रहा है” ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ा जा सके।
क्या है पूरा मामला और वायरल वीडियो?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मेरठ पुलिस ने इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और एक विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था।
हिरासत में मारपीट का आरोप: वायरल वीडियो में कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों को हिरासत में लिए गए एक प्रदर्शनकारी (जिसकी पहचान रवि गौतम के रूप में की जा रही है) के साथ तीखी बहस करते और उसे थप्पड़ मारते हुए देखा गया।
जनता में आक्रोश: वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
https://www.facebook.com/reel/1968804447067819
एसएसपी अविनाश पांडे का पुलिस कार्रवाई पर बचाव
वीडियो पर मचे हंगामे के बाद मीडिया से बात करते हुए मेरठ एसएसपी अविनाश पांडे ने साफ किया कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए। उनके बयान के मुख्य बिंदु:
बाहरी तत्वों द्वारा भड़काने की कोशिश: एसएसपी ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व और बाहरी लोग पीड़ित परिवार के सदस्यों को पुलिस और प्रशासन के खिलाफ भड़काने (उत्तेजित करने) का काम कर रहे हैं।
शांति व्यवस्था प्राथमिकता: उन्होंने दलील दी कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य इलाके में किसी भी प्रकार की हिंसा या दंगे जैसी स्थिति को रोकना था, और कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना के बाद से मेरठ में तनाव का माहौल है:
विपक्ष का हमला: विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के ‘कानून के राज’ के दावों पर सवाल खड़े किए हैं और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल निलंबन की मांग की है।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)





