नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए रेपो रेट को फिलहाल यथावत रखने का ऐलान किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है।इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों ने होम लोन, ऑटो लोन या अन्य फ्लोटिंग रेट वाले लोन ले रखे हैं, उनकी मासिक किस्त (EMI) पर इसका क्या असर पड़ेगा।
EMI पर क्या होगा असर?
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का मतलब है कि फिलहाल बैंकों के लिए RBI से उधार लेने की लागत में भी कोई बदलाव नहीं होगा। ऐसे में अधिकांश बैंकों द्वारा होम लोन और ऑटो लोन की ब्याज दरों में तत्काल बदलाव की संभावना कम है। यदि आपका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर से जुड़ा है, तो फिलहाल आपकी EMI में भी कोई बदलाव नहीं होगा, जब तक कि बैंक अपनी ओर से ब्याज दरों में संशोधन न करे।
रेपो रेट क्या होती है?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए कर्ज देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। वहीं, रेपो रेट घटने पर बैंकों की उधारी सस्ती होती है और ग्राहकों को कम ब्याज दर का लाभ मिल सकता है।
RBI ने क्यों नहीं बदली रेपो रेट?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। ऐसे में केंद्रीय बैंक ने ‘न्यूट्रल’ नीति रुख बनाए रखते हुए रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है। इससे महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
महंगाई अनुमान में राहत
हालांकि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (Retail Inflation) के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5.0% कर दिया है। यह संकेत देता है कि केंद्रीय बैंक को आने वाले समय में महंगाई के मोर्चे पर कुछ राहत की उम्मीद है।
आम लोगों के लिए क्या मायने?
- होम और ऑटो लोन की EMI फिलहाल पहले जैसी ही रहने की संभावना।
- नई ब्याज दरों की घोषणा होने तक लोन लेने वालों को तत्काल राहत या अतिरिक्त बोझ नहीं।
- फ्लोटिंग रेट वाले लोनधारकों को भविष्य में RBI के अगले फैसलों पर नजर रखनी होगी।
- महंगाई के अनुमान में कमी से अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।
RBI का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और घरेलू महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना केंद्रीय बैंक की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। अब बाजार और लोन लेने वाले लोगों की नजर RBI की अगली मॉनेटरी पॉलिसी बैठक पर रहेगी।



