दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क दुर्घटना में घायल एक युवती की इलाज के दौरान मौत हो गई, लेकिन इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए परिजनों को दो दिनों तक अस्पतालों और थाने के चक्कर लगाने पड़े।
इलाज के दौरान हुई मौत
जानकारी के अनुसार, 30 जुलाई को हुए सड़क हादसे में युवती गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उसे उपचार के लिए शंकराचार्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 2 अगस्त को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृत्यु के बाद परिजनों को उम्मीद थी कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
पोस्टमार्टम के लिए भटकते रहे परिजन
परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम कराने के लिए उन्हें पहले शंकराचार्य अस्पताल और फिर लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल भेजा गया। इसी दौरान, कथित तौर पर अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को पूर्व सूचना दिए बिना शव जामुल थाना पुलिस को सौंप दिया।
इसके बाद पुलिस भी पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए विभिन्न अस्पतालों के बीच समन्वय करती रही। इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो दिन बीत गए, जबकि परिजन अंतिम संस्कार का इंतजार करते रहे।
हंगामे के बाद सीएम अस्पताल में हुआ पोस्टमार्टम
मामले की जानकारी मिलने पर स्थानीय पार्षद वीणा चंद्राकर अस्पताल पहुंचीं और व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। उनके हस्तक्षेप और हंगामे के बाद युवती के शव का पोस्टमार्टम सीएम अस्पताल में कराया गया।
अस्पताल प्रबंधन पर लगे आरोप
पार्षद वीणा चंद्राकर ने शंकराचार्य अस्पताल प्रबंधन पर इलाज और मृत्यु के बाद की प्रक्रिया में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



