दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। बताया जा रहा है कि इन बच्चों को काम कराने के उद्देश्य से रायपुर से बस के माध्यम से कहीं और ले जाया जा रहा था। मामले में पुलिस ने एक नियोक्ता को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुई टीम
जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम करीब 7 बजे राज्य बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा को सूचना मिली कि कुछ बच्चों को बस के जरिए दूसरे स्थान पर काम के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही राज्य बाल आयोग ने एसजेपीयू दुर्ग (Special Juvenile Police Unit) और चाइल्ड हेल्पलाइन टीम को अलर्ट किया।
इसके बाद संयुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और संदिग्ध बस की तलाश शुरू की।
बस रोककर किया गया बच्चों का रेस्क्यू
करीब डेढ़ घंटे की कार्रवाई के बाद शाम लगभग 8:30 बजे टीम ने बस को रोककर जांच की। जांच के दौरान बस में 16 बच्चे मिले, जिन्हें तत्काल सुरक्षित बाहर निकाला गया।
मौके से बच्चों के साथ मौजूद एक नियोक्ता को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चों को मजदूरी के काम के लिए ले जाने की योजना थी।
बाल गृह में रखे गए बच्चे, जांच जारी
अधिकारियों के मुताबिक, सभी बच्चों को सुरक्षित बाल गृह भेज दिया गया है। बच्चों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा था और इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस और संबंधित विभाग मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। यदि जांच में बाल तस्करी या बड़े बाल श्रम नेटवर्क से जुड़े सबूत मिलते हैं, तो इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बाल श्रम के खिलाफ अभियान जारी
अधिकारियों ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। इस रेस्क्यू अभियान को बाल श्रम और बच्चों के शोषण के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



