भोजपुर/पटना: बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर पूरे राज्य में उबाल है। शासन-प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद इस घटना को लेकर जनता और सोशल मीडिया का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच, इस मामले में बिहार के चर्चित यूट्यूबर टाइगर यादव (अनीश यादव) की एंट्री हो गई है।
टाइगर यादव सीधे उस घटना स्थल पर पहुंचे जहां भरत तिवारी को पुलिस की पहली गोली लगी थी। वहां पहुंचकर उन्होंने जमीन से खून से सनी मिट्टी उठाई, उसे अपने माथे से लगाया और सिस्टम को खुली चेतावनी दी।
“एक भरत को मारकर उसकी आवाज नहीं दबा सकते”
घटनास्थल पर स्थानीय युवाओं की मौजूदगी में टाइगर यादव ने भावुक और आक्रामक अंदाज में कहा:
“मेरे हाथ में जो मिट्टी आप देख रहे हैं, वह कोई आम मिट्टी नहीं है। यह हमारे भाई भरत तिवारी के खून से सनी मिट्टी है। इस मिट्टी की कसम खाकर मैं आज कह रहा हूँ कि हम युवा एकजुट होकर भरत तिवारी के शुरू किए गए अधूरे कामों को पूरा करेंगे। अगर सिस्टम में बैठे लोगों को लगता है कि एनकाउंटर करके उन्होंने उसकी आवाज दबा दी है, तो वे सुन लें कि यहां खड़ा हर एक युवा अब भरत तिवारी बन चुका है।”
सामाजिक कार्यकर्ता थे या अपराधी? सिस्टम पर उठाए सवाल
यूट्यूबर ने गांव की जर्जर सड़कों और बिजली के खंभों की तरफ कैमरा घुमाते हुए प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी कोई अपराधी नहीं थे, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ सीना तानकर लड़ने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता थे।
टाइगर यादव ने आरोप लगाया कि भरत का सबसे बड़ा गुनाह यह था कि उन्होंने गरीब समुदाय के हक के लिए अधिकारियों के दफ्तरों में डटकर खड़े होने की हिम्मत दिखाई। उन्होंने अपने स्तर पर गांव में बिजली के खंभे लगवाए और जर्जर रास्तों को ठीक करवाया, जो भ्रष्ट अधिकारियों की आंखों में खटक रहा था।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर साधा निशाना
टाइगर यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि अगर सरकार को एनकाउंटर करने का इतना ही शौक है, तो वह छात्रों का भविष्य बर्बाद करने वाले पेपर लीक माफियाओं और मासूम बच्चियों का शोषण करने वाले दरिंदों का एनकाउंटर क्यों नहीं करती? उन्होंने शराबबंदी को लेकर भी सरकार को घेरा और कहा कि कागजों पर बंद होने के बाद भी हर गांव में शराब बिक रही है, लेकिन सरकार दारू माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय गरीबों और समाज के लिए लड़ने वालों को निशाना बना रही है।
क्या है पूरा मामला?
- तारीख और जगह: 17 जून 2026 को भोजपुर के शाहपुर थाना अंतर्गत बिलौटी गांव में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी।
- पुलिस का दावा: पुलिस का कहना था कि भरत हवा में फायरिंग कर रहे थे और आत्मसमर्पण करने के लिए कहने पर उन्होंने पुलिस टीम और STF पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद आत्मरक्षा में उनके पैर में गोली मारी गई। इलाज के दौरान PMCH में उनकी मौत हो गई।
- वीडियो से खुला राज: घटना के दौरान भरत तिवारी फेसबुक लाइव थे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि गोली चलने से ठीक पहले भरत अपनी पिस्टल दूर फेंककर सरेंडर (आत्मसमर्पण) कर चुके थे।
- अब तक की कार्रवाई: बढ़ते जन-आक्रोश और राजनीतिक दबाव के बाद सरकार ने चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) के आदेश दिए हैं। खेसारी लाल यादव और पप्पू यादव जैसे कई बड़े चेहरे भी पीड़ित परिवार से मिलकर न्याय की मांग कर चुके हैं।





