CG News: निजी स्कूलों में RTE फंड पर उठे सवाल, 31 हजार बच्चों के नाम पर 1.84 करोड़ रुपये; 562 स्कूल जांच के दायरे में

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छत्तीसगढ़। प्रदेश के निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार यानी RTE के तहत पढ़ने वाले गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए जारी होने वाली ड्रेस और किताबों की राशि को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान 562 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 31,191 RTE विद्यार्थियों के लिए करीब 1.84 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है।

आरोप है कि शासन की ओर से राशि जारी होने के बावजूद कई बच्चों और उनके अभिभावकों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। मामला सामने आने के बाद अब स्कूलवार भुगतान, राशि के उपयोग और बच्चों को मिली सुविधाओं का सत्यापन कराने की तैयारी की जा रही है।

31,191 बच्चों के लिए 1.84 करोड़ रुपये का प्रावधान

शासन के प्रावधान के मुताबिक वर्ष 2025-26 में RTE के तहत प्रत्येक विद्यार्थी के लिए गणवेश के लिए 541 रुपये और पुस्तकों के लिए 250 रुपये, यानी कुल 791 रुपये निर्धारित किए गए हैं।

जिले में RTE के तहत 31,191 विद्यार्थी अध्ययनरत रहे। इस हिसाब से ड्रेस और किताबों के लिए निर्धारित राशि करीब 1 करोड़ 84 लाख रुपये बैठती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह राशि वास्तव में बच्चों की ड्रेस और किताबों पर खर्च हुई या नहीं। इसी को लेकर स्कूलवार भुगतान और राशि के उपयोग की जांच की मांग उठ रही है।

बच्चों के बजाय स्कूलों के खाते में पहुंचने का आरोप

मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि ड्रेस और किताबों के लिए निर्धारित राशि निजी स्कूल प्रबंधन के खातों तक पहुंचती है, लेकिन इसका पूरा लाभ विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों तक नहीं पहुंच रहा।

कुछ पालकों का दावा है कि जब उन्होंने स्कूल प्रबंधन से ड्रेस और किताबों के लिए मिलने वाली राशि के बारे में जानकारी मांगी, तो उन्हें बताया गया कि यह रकम स्कूल के खाते में आती है और स्कूल की जरूरत के अनुसार खर्च की जाती है।

यदि ऐसा है तो यह जांच का विषय है कि शासन द्वारा निर्धारित राशि किस मद में खर्च की गई और क्या स्कूल प्रबंधन के पास उसके उपयोग का उचित रिकॉर्ड मौजूद है।

बड़े स्कूलों में हजारों रुपये की राशि

RTE विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने वाले निजी स्कूलों में ड्रेस और पुस्तक मद की राशि भी हजारों रुपये तक पहुंचती है। जानकारी के अनुसार कुछ स्कूलों में यह राशि 40 हजार से लेकर करीब 62 हजार रुपये तक होने की बात सामने आई है।

ऐसे में स्कूलवार यह सत्यापन जरूरी हो जाता है कि विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर जारी राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए किया गया या नहीं।

गरीब परिवारों पर बढ़ सकता है आर्थिक बोझ

RTE योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार की ओर से बच्चों की शिक्षा से संबंधित निर्धारित खर्च के लिए स्कूलों को सहायता राशि दी जाती है।

लेकिन यदि ड्रेस, किताबें और अन्य जरूरी शैक्षणिक सामग्री का खर्च भी अभिभावकों को अपनी जेब से उठाना पड़े, तो योजना का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

कई परिवारों के लिए यूनिफॉर्म, किताबें और कॉपियों का खर्च अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सरकारी सहायता का वास्तविक लाभ पात्र बच्चों तक पहुंचे।

सत्यापन के बाद जारी होती है राशि

RTE के तहत दाखिले और भुगतान की प्रक्रिया में नोडल प्राचार्यों के सत्यापन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ती है और निर्धारित राशि स्कूलों को जारी की जाती है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि राशि जारी होने के बाद उसके उपयोग की निगरानी किस स्तर पर की गई। यदि किसी स्कूल में बच्चों को निर्धारित सुविधा नहीं मिली है, तो सत्यापन प्रक्रिया और भुगतान के बाद की निगरानी की भी जांच जरूरी होगी।

इसी को देखते हुए संबंधित निजी स्कूलों का स्कूलवार भुगतान और भौतिक सत्यापन कराने की मांग उठ रही है।

किस कक्षा में कितने RTE विद्यार्थी?

वर्ष 2025-26 में जिले के निजी स्कूलों में RTE के तहत कुल 31,191 विद्यार्थी अध्ययनरत रहे। कक्षा के अनुसार आंकड़ों में नर्सरी में 2,062, KG-1 में 2,794, KG-2 में 2,552 और पहली कक्षा में 4,079 विद्यार्थी शामिल हैं।

वहीं दूसरी कक्षा में 3,540, तीसरी में 3,505, चौथी में 3,348, पांचवीं में 2,323, छठवीं में 1,988, सातवीं में 1,680 और आठवीं में 1,342 विद्यार्थी RTE के तहत पढ़ रहे थे।

नौवीं में 886, दसवीं में 694, ग्यारहवीं में 291 और बारहवीं में 107 विद्यार्थी RTE के तहत अध्ययनरत रहे।

नए सत्र में 4,241 आवेदन, 1,404 बच्चों का दाखिला

वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में भी RTE के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। जिले के 562 निजी स्कूलों में दाखिले के लिए अब तक 4,241 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

इन स्कूलों में RTE के तहत कुल 2,237 सीटें निर्धारित हैं। इनमें से अब तक 1,404 बच्चों का दाखिला हो चुका है, जबकि 833 सीटें रिक्त हैं।

पुराने सत्र की राशि को लेकर उठे सवालों के बीच अब नए सत्र में भी यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि RTE के तहत मिलने वाली ड्रेस, किताबों और अन्य निर्धारित सुविधाओं का लाभ पात्र बच्चों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल मामला जांच और सत्यापन की दिशा में बढ़ रहा है। स्कूलवार रिकॉर्ड, भुगतान की जानकारी और बच्चों को वास्तव में मिली सुविधाओं का भौतिक सत्यापन होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए किया गया या नहीं।

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