रायपुर। छत्तीसगढ़ के दो प्रमुख शहर रायपुर और बिलासपुर के प्रवेश द्वार इन दिनों वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बने हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-130) पर बने दोनों शहरों के एंट्री प्वाइंट इतने संकरे और अस्पष्ट हैं कि खासकर नए और बाहरी वाहन चालक अक्सर सही मोड़ छोड़कर आगे निकल जाते हैं। इससे उन्हें कई किलोमीटर आगे जाकर यू-टर्न लेना पड़ता है, जिससे समय, ईंधन और संसाधनों की बर्बादी हो रही है।
रायपुर आने वाले पहुंच रहे टाटीबंध
बिलासपुर की ओर से रायपुर आने वाले कई वाहन चालक शहर का मुख्य प्रवेश मार्ग पहचान नहीं पाते और सीधे टाटीबंध की ओर निकल जाते हैं। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, अस्पताल या शहर के अन्य हिस्सों में जाने वाले लोगों को मोबाइल मैप या स्थानीय लोगों की मदद से वापस लौटना पड़ता है। रात के समय यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है।
बिलासपुर में भी यही हाल
इसी तरह रायपुर से बिलासपुर आने वाले वाहन चालकों के लिए पेंड्रीडीह क्षेत्र सबसे बड़ा भ्रम का केंद्र बन गया है। यहां शहर का प्रवेश मार्ग इतना संकरा है कि कई वाहन चालक उसे पहचान नहीं पाते और सीधे ढेका-जांजगीर मार्ग की ओर निकल जाते हैं। बाद में कई किलोमीटर आगे जाकर उन्हें यू-टर्न लेना पड़ता है।
सड़क सुरक्षा मानकों की अनदेखी
रोड और ट्रैफिक विशेषज्ञ समीर पाटनी के अनुसार, सड़क इंजीनियरिंग और यातायात मानकों के तहत किसी भी मोड़ से कम से कम 100 मीटर पहले स्पष्ट संकेतक (साइन बोर्ड) होना चाहिए। इसके अलावा डायवर्जन वाले स्थानों पर रोड मार्किंग, क्रैश बैरियर और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी आवश्यक है। उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति भ्रम के साथ-साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ा रही है।
तकनीकी जांच के बाद होगा समाधान
लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री अरुण साव ने कहा कि पूरे मामले की तकनीकी जांच कराई जाएगी और आवश्यक सुधारों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संबंधित सड़क भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधीन है। साथ ही धनेली क्षेत्र में रोड सेपरेटर लगाने के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया है।
जल्द सुधार की उम्मीद
राज्य के दो सबसे महत्वपूर्ण शहरों के प्रवेश द्वारों पर लगातार हो रही इस समस्या ने सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते स्पष्ट साइन बोर्ड, बेहतर रोड डिजाइन, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा मानकों को लागू किया जाए, तो वाहन चालकों की परेशानी कम होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं की संभावना भी काफी हद तक घटाई जा सकती है।



