नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब पूरी तरह भड़क चुकी है। टीएमसी में चल रही बगावत अब अपने चरम पर पहुंच गई है, जिससे ममता बनर्जी के राजनीतिक साम्राज्य को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगने की उम्मीद है।
मिली जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी रविवार, 14 जून को देश की राजधानी दिल्ली पहुंच रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी का यह दिल्ली दौरा बंगाल की राजनीति में एक नया इतिहास लिखने वाला माना जा रहा है, जहां वे टीएमसी के बागी सांसदों के साथ एक बेहद गोपनीय और महत्वपूर्ण बैठक करेंगे।
सोमवार को लोकसभा स्पीकर से मिलेंगे बागी सांसद
अंदरूनी सूत्रों और मिल रही खबरों के अनुसार, टीएमसी के ये सभी बागी सांसद सोमवार, 15 जून को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करने वाले हैं। स्पीकर से मुलाकात करने से ठीक पहले शुभेंदु अधिकारी इन सांसदों के साथ रणनीति तैयार करने के लिए बैठक करेंगे। टीएमसी के बागी सांसद जगदीश बासुनिया ने खुद इस खबर की पुष्टि की है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
ममता बनर्जी को लगेगा सबसे बड़ा झटका: NDA में शामिल होने की तैयारी!
राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह मुलाकात ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के वजूद के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकट साबित हो सकती है। सियासी गलियारों में यह अटकलें तेज हैं कि:
- 19 सांसद छोड़ सकते हैं साथ: टीएमसी के करीब 19 सांसद पार्टी से अलग होने का मन बना चुके हैं।
- NDA का थामेंगे हाथ: ये सभी बागी सांसद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने की तैयारी में हैं।
- अलग संसदीय ब्लॉक की मांग: सोमवार को बागी सांसद स्पीकर ओम बिरला के सामने टीएमसी से अलग एक नया ‘संसदीय ब्लॉक’ (Parliamentary Block) बनाने की आधिकारिक मांग रखेंगे।
चुनाव में हार के बाद फूटा असंतोष: लीडरशिप पर उठे गंभीर सवाल
हाल ही में संपन्न हुए असेंबली चुनाव में टीएमसी को मिली करारी शिकस्त के बाद से ही पार्टी के भीतर दरारें साफ दिखाई देने लगी थीं। चुनाव नतीजों के बाद से पार्टी के नेता और सांसद घुटन महसूस कर रहे थे, जो अब खुलकर सामने आ गया है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है: “कई वरिष्ठ नेता और सांसद अब खुले तौर पर यह कह रहे हैं कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की लीडरशिप (नेतृत्व) में पार्टी का कोई भविष्य नहीं बचा है। तानाशाही रवैये और कार्यकर्ताओं की अनदेखी के कारण पार्टी गर्त में जा रही है।”
शुभेंदु अधिकारी की ‘बैकडोर डिप्लोमेसी’ लाई रंग
यह पहली बार नहीं है जब शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी में सेंध लगाई हो। खबर है कि शुभेंदु पिछले कई हफ्तों से टीएमसी के विद्रोही सांसदों और विधायकों के साथ लगातार संपर्क में थे और ‘बैकडोर डिप्लोमेसी’ के जरिए उन्हें साध रहे थे। इससे पहले भी उनकी कई गुप्त बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन, दिल्ली में होने जा रही यह बैठक इसलिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके ठीक अगले दिन टीएमसी को संसद के भीतर कानूनी और तकनीकी रूप से तोड़ने की तैयारी है।
आगे क्या होगा?
यदि सोमवार को 19 सांसद टीएमसी से अलग होकर नया गुट बना लेते हैं, तो संसद में ममता बनर्जी की पार्टी की ताकत आधी से भी कम रह जाएगी। वहीं दूसरी ओर, बंगाल की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे शुभेंदु अधिकारी इस बगावत के जरिए राज्य में विपक्ष को पूरी तरह से साफ करने और अपनी स्थिति को और मजबूत करने के मिशन में जुटे हैं।





