बेंगलुरु: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कांग्रेस ने अपने सवालों का दायरा और बढ़ा दिया है। कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने संगठन की कार्यप्रणाली, वित्तीय व्यवस्था और संवैधानिक प्रतिबद्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में काम करने वाली हर संस्था को पारदर्शिता और जवाबदेही के मानकों पर खरा उतरना चाहिए।
हरिप्रसाद ने कहा कि भारत का संविधान लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और किसी भी संगठन के लिए उसके मूल्यों का सम्मान करना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय संस्थाओं को अपनी गतिविधियों और वित्तीय ढांचे को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
- प्रियंक खड़गे के बयान को मिला समर्थन
कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि संगठन की कानूनी स्थिति, फंडिंग और कर अनुपालन जैसे सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूरी तरह जायज हैं। उनके मुताबिक, इन विषयों पर चर्चा को राजनीतिक विवाद के बजाय सार्वजनिक जवाबदेही के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
- वित्तीय पारदर्शिता पर कांग्रेस का जोर
हरिप्रसाद ने कहा कि देश में पंजीकृत संस्थाओं और संगठनों से पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण है कि किसी संगठन के आर्थिक संसाधनों का स्रोत क्या है, उसका उपयोग कैसे किया जाता है और क्या संबंधित नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।
उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस आने वाले समय में इस मुद्दे को और मजबूती से उठाएगी तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग जारी रखेगी।
- RSS की ओर से नहीं आई नई प्रतिक्रिया
हालिया टिप्पणियों पर RSS की तरफ से अभी कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि संघ पहले भी यह स्पष्ट करता रहा है कि उसकी गतिविधियां कानून के अनुरूप संचालित होती हैं और संबंधित संस्थाओं के समक्ष आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
- राजनीतिक बहस होने के आसार
RSS को लेकर कांग्रेस के नए सवालों ने राजनीतिक माहौल को फिर गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। एक तरफ कांग्रेस इसे पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर पेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा और संघ समर्थक इसे वैचारिक और राजनीतिक हमला बता सकते





