श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमरनाथ यात्रा के दौरान बाबा बर्फानी के प्राकृतिक शिवलिंग को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी तरह प्रकृति और श्रद्धा से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक शिवलिंग कितने दिनों तक रहेगा, इसका फैसला कोई व्यक्ति या संस्था नहीं कर सकती। यह पूरी तरह प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है और इसमें किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक शिवलिंग लगभग छह दिनों तक रहा। उन्होंने कहा कि इसे लेकर किसी तरह की अटकलें लगाने या किसी पर जिम्मेदारी तय करने का कोई आधार नहीं है, क्योंकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से इस विषय को धार्मिक आस्था और प्रकृति के दृष्टिकोण से देखने की अपील की।
उमर अब्दुल्ला ने अमरनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि यात्रा में प्रतिदिन शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार तय की जाती है। उन्होंने बताया कि श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड इन्हीं निर्देशों के अनुरूप यात्रा का संचालन करता है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा तथा अन्य व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है।
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने प्राकृतिक शिवलिंग के समय से पहले अंतर्ध्यान होने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अमरनाथ गुफा क्षेत्र में बढ़ते निर्माण कार्य, श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और प्रस्तावित रोपवे परियोजना को लेकर सवाल उठाए। इल्तिजा ने कहा कि इन सभी पहलुओं का पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसकी गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए।
अमरनाथ यात्रा हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होती है। ऐसे में प्राकृतिक शिवलिंग को लेकर उठे सवालों और नेताओं के बयानों के बीच एक बार फिर यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण, श्रद्धालुओं की संख्या और विकास परियोजनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।





