मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सियासी हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी बीच Sanjay Raut ने Eknath Shinde के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर कई सवाल खड़े किए हैं।
राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केवल सत्ता, प्रशासनिक ताकत और राजनीतिक दबाव के सहारे लंबे समय तक जनसमर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि जनता सब कुछ देख रही है और सही समय आने पर अपना फैसला सुनाएगी। उन्होंने संकेतों में कहा कि राजनीतिक विचारधारा से समझौता करने वाले नेताओं को अंततः जनता के बीच जवाब देना पड़ता है।
‘विचारों की राजनीति बनाम सत्ता की राजनीति’
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा विचारों और जनहित के मुद्दों पर आधारित रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ के लिए अपने मूल सिद्धांतों से दूर हो गए हैं। राउत ने कहा कि सत्ता बदल सकती है, लेकिन जनता की याददाश्त और लोकतांत्रिक ताकत को कम करके नहीं आंका जा सकता।
शिंदे के दावों पर विपक्ष का पलटवार
हाल ही में मुख्यमंत्री Eknath Shinde ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए दावा किया था कि उनकी सरकार ने राज्य में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को गति दी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी अगुवाई वाली शिवसेना ही Bal Thackeray की विचारधारा को आगे बढ़ा रही है।
इन बयानों के बाद विपक्ष ने सरकार पर राजनीतिक लाभ लेने और विरोधियों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, महायुति सरकार का कहना है कि उसका पूरा फोकस विकास, निवेश और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर बढ़ा सस्पेंस
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के पीछे कोई बड़ी रणनीति हो सकती है। हालांकि, इस विषय पर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। विपक्ष इसे राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की कल्पना करार दे रहा है।
चुनावी माहौल से पहले बढ़ी सियासी तल्खी
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। बदलते गठबंधनों, नेतृत्व के दावों और संगठनात्मक ताकत के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने समर्थकों को साधने में जुटे हैं। ऐसे में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकती है।





