तिरुवनंतपुरम। पीएम श्री (PM SHRI) योजना को लेकर केरल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन ने यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसके बदले हुए रुख पर सवाल उठाए हैं। विजयन का कहना है कि जिस योजना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का कभी कांग्रेस और UDF खुलकर विरोध करते थे, आज उसी को लेकर सरकार का रुख बदल जाना कई सवाल खड़े करता है।
विजयन ने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि आखिर किन परिस्थितियों में सरकार ने अपना पुराना रुख बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से दी जा रही सफाई न तो स्पष्ट है और न ही लोगों का भरोसा जीत पाने में सफल हो रही है। उनके मुताबिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सरकार को पूरी पारदर्शिता के साथ अपना पक्ष रखना चाहिए।
विवाद की जड़ उस समय सामने आई जब केरल की UDF सरकार ने संकेत दिए कि राज्य पीएम श्री योजना से पूरी तरह पीछे नहीं हटेगा। सरकार का तर्क है कि पिछली सरकार द्वारा केंद्र के साथ किए गए समझौतों और योजना के तहत प्राप्त वित्तीय सहायता को देखते हुए इसे पूरी तरह समाप्त करना व्यावहारिक नहीं होगा। हालांकि सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि पाठ्यक्रम, शैक्षणिक नीतियों और स्कूलों के चयन जैसे मामलों में राज्य की स्वायत्तता बरकरार रखी जाएगी।
मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने कहा है कि राज्य सरकार किसी भी परिस्थिति में अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि योजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिए एक कैबिनेट उपसमिति का गठन किया गया है, जो विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार के समक्ष राज्य का पक्ष रखेगी।
दूसरी ओर, वाम दल इस मुद्दे को राजनीतिक अवसरवाद से जोड़कर देख रहे हैं। उनका आरोप है कि विपक्ष में रहते हुए जिस योजना का विरोध किया गया, सत्ता में आते ही उसके प्रति नरम रुख अपनाना जनता के साथ राजनीतिक विरोधाभास को दर्शाता है। विजयन ने कहा कि सरकार को केवल प्रशासनिक मजबूरियों का हवाला देने के बजाय स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि उसकी शिक्षा नीति को लेकर वास्तविक सोच क्या है।
पीएम श्री योजना को लेकर छिड़ी यह बहस अब केवल शिक्षा नीति तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह केरल की राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक विश्वसनीयता का मुद्दा बनती जा रही है। आने वाले दिनों में इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।





