नकटी गांव बुलडोजर एक्शन पर गरमाई सियासत, वीरेंद्र सिंह तोमर बोले- गरीबों को बेघर करना अस्वीकार्य

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रायपुर/नया रायपुर | 2 जुलाई 2026

राजधानी रायपुर से सटे नकटी गांव में ‘विधायक कॉलोनी’ निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े जन-आंदोलन में बदल चुका है। मंगलवार सुबह प्रशासन ने 4000 पुलिसकर्मियों के कड़े पहरे के बीच 14 बुलडोजर (JCB) चलाकर 85 से अधिक गरीब परिवारों के मकानों को जमींदोज कर दिया। इस बर्बर कार्रवाई से 100 से ज्यादा परिवार इस मानसूनी बारिश में खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।

इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है और बेघर हुए ग्रामीण रायपुर की सड़कों पर धरना दे रहे हैं। अब इस विवाद में क्षत्रिय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर की एंट्री हो गई है, जिन्होंने सरकार की इस कार्रवाई को “घृणित और अमानवीय” करार दिया है।

“बारिश में बच्चों-बुजुर्गों की छत छीनना महापाप” — वीरेंद्र सिंह तोमर

लगातार प्रभावित ग्रामीणों के संपर्क में रह रहे समाजसेवी और करणी सेना प्रमुख वीरेंद्र सिंह तोमर ने सीधे तौर पर प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ग्राउंड जीरो से सवाल उठाते हुए कहा:

“जब से यह घटना घटी है, लगातार बेघर लोग मुझसे मदद की गुहार लगा रहे हैं। सरकार की यह कार्रवाई पूरी तरह घृणित है। इस कड़कड़ाती बारिश के मौसम में मासूम बच्चों, बेसहारा बुजुर्गों और महिलाओं के सिर से छत छीन लेना अमानवीयता की पराकाष्ठा है। अगर समाज का एक बड़ा हिस्सा इस तरह प्रताड़ित हो रहा है, तो चुप बैठना बुजदिली होगी। हम इन गरीबों की लड़ाई आखिरी दम तक लड़ेंगे।”

करणी सेना ने इसे पूरी तरह ‘गरीब विरोधी कार्रवाई’ बताते हुए प्रशासन के खिलाफ उग्र नारेबाजी की और मांग की है कि जब तक हर एक परिवार का सम्मानजनक पुनर्वास नहीं होता, आंदोलन थमेगा नहीं।

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ऑपरेशन ‘विधायक कॉलोनी’: आंकड़ों की नजर से

  • फोर्स की तैनाती: लगभग 4,000 पुलिसकर्मी, ताकि कोई विरोध न कर सके।
  • मशीनों का वार: एक साथ 14 बुलडोजर और JCB मशीनों को काम पर लगाया गया।
  • समय: 48 घंटे का अल्टीमेटम (नोटिस) खत्म होते ही मंगलवार सुबह अचानक कार्रवाई शुरू हुई।
  • संयुक्त टीम: नगर निगम, राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और यहाँ तक कि SDRF (आपदा प्रबंधन) की टीमें भी मौके पर मुस्तैद थीं, मानो किसी दुश्मन पर कार्रवाई हो रही हो।

ग्रामीणों का तीखा सवाल:

मलबे के ढेर पर बैठे ग्रामीणों ने रोते हुए प्रशासन की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

  1. सालों पुराना ठिकाना: लोग यहाँ पिछले 30 से 40 साल से रह रहे हैं।
  2. पक्के सबूत: गांव में सालों से बिजली के कनेक्शन हैं, पानी की सप्लाई है, सरकारी स्कूल, शौचालय और पक्की सड़कें मौजूद हैं।
  3. अचानक यू-टर्न: ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार हमें सारी सुविधाएं दे रही थी, तब हम वैध थे; आज वीआईपी लोगों के लिए ‘विधायक कॉलोनी’ बनानी है तो हमें रातों-रात ‘अतिक्रमणकारी’ घोषित कर दिया गया?

ग्राउंड पर धक्का-मुक्की और भारी तनाव

कार्रवाई के दौरान कई बार माहौल बेहद संवेदनशील हो गया। अपनी जिंदगी भर की कमाई को ढहते देख महिलाओं और बुजुर्गों ने बुलडोजर के सामने लेटकर विरोध दर्ज कराया। पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और झड़प की तस्वीरें भी सामने आईं, लेकिन भारी बल के आगे गरीबों की चीखें दबा दी गईं।

सवालों के घेरे में प्रशासन का ‘अतिक्रमण हटाओ’ दावा

हालांकि, ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन का केवल यही एक रटा-रटाया दावा है कि यह जमीन सरकारी थी और यह एक सामान्य ‘अतिक्रमण हटाओ अभियान’ था। लेकिन प्रशासन के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि अगर यह जमीन विधायक कॉलोनी के लिए आरक्षित की जा रही थी, तो इन 85 गरीब परिवारों के लिए पहले से पक्के पुनर्वास (Rehabilitation) का इंतजाम क्यों नहीं किया गया?

फिलहाल, पीड़ित परिवार रायपुर में डटे हुए हैं और वीरेंद्र सिंह तोमर व अन्य सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के समर्थन के बाद यह मामला छत्तीसगढ़ सरकार के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है।

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