नई दिल्ली:
देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल के तेजी से बढ़ते दायरे के बीच अब ट्रांसपोर्ट सेक्टर ने सरकार की इस महत्वाकांक्षी नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (AIMGTA) ने इस नीति पर गंभीर व्यावहारिक सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का साफ कहना है कि बिना व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और स्पष्ट जवाबदेही तय किए, करोड़ों रुपये के व्यावसायिक (Commercial) वाहनों को किसी भी “नीतिगत प्रयोग” की प्रयोगशाला नहीं बनाया जाना चाहिए।
सबसे बड़ी चिंता: माइलेज घटने से बढ़ेगी परिवहन लागत
ट्रांसपोर्ट संगठनों ने E20 ईंधन के आर्थिक नुकसानों को लेकर सरकार को चेतावनी दी है:
- 2 से 6% तक माइलेज कम होने का दावा: एसोसिएशन ने विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक घट जाता है।
- मालभाड़े पर पड़ेगा सीधा असर: ट्रकों और बसों का माइलेज घटने से ईंधन की खपत बढ़ेगी, जिससे परिवहन लागत (Transportation Cost) में भारी इजाफा होगा।
- महंगाई बढ़ने का खतरा: बढ़ती परिचालन लागत का सीधा बोझ मालभाड़े के रूप में आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों की जेब पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है।
पुराने वाहनों की सुरक्षा भगवान भरोसे? इंजन खराब होने का डर
AIMGTA ने विशेष रूप से सड़कों पर दौड़ रहे पुराने कमर्शियल वाहनों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है:
- तकनीकी रूप से अनुकूल नहीं: देश में चल रहे लाखों पुराने ट्रकों और व्यावसायिक वाहनों के इंजन और फ्यूल सिस्टम E20 ईंधन के अनुकूल (Compatible) नहीं हैं।
- नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?: ट्रांसपोर्टर्स का सवाल है कि यदि E20 के इस्तेमाल से इंजन, फ्यूल पंप, या पाइपलाइन में खराबी आती है, तो इसकी वित्तीय जिम्मेदारी कौन उठाएगा? सरकार को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
निष्कर्ष: पर्यावरण बनाम आर्थिक हित
हम पर्यावरण संरक्षण और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के सरकार के उद्देश्य की सराहना करते हैं। लेकिन स्वच्छ ईंधन का लक्ष्य हासिल करने की जल्दबाजी में देश की लाइफलाइन कहे जाने वाले ट्रांसपोर्ट उद्योग और लाखों वाहन मालिकों के आर्थिक हितों को दांव पर नहीं लगाया जा सकता।”





