वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस ऑपरेशन में ईरान के एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज साइट और सैन्य लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना
CENTCOM के मुताबिक, हालिया एयर स्ट्राइक में ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जहां ड्रोन, सैन्य उपकरण और युद्धक सामग्री रखी गई थी। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों से ईरान की सैन्य गतिविधियों और रणनीतिक क्षमताओं को बड़ा झटका लगा है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका का आरोप
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले 30 से अधिक व्यावसायिक जहाजों पर हमले किए हैं। इन घटनाओं से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ और कई नाविकों की सुरक्षा खतरे में पड़ी।
ट्रंप ने बातचीत से किया इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल ईरान के साथ किसी भी तरह की वार्ता में उनकी रुचि नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रखेगा, जब तक क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।
ईरान ने भी की जवाबी कार्रवाई
अमेरिकी हमलों के बीच ईरान ने भी जवाबी कदम उठाए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में एक तेल टैंकर को निशाना बनाया। इसके अलावा बहरीन और कुवैत की दिशा में मिसाइल हमलों की भी खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
500 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ जारी संघर्ष में घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या 500 से अधिक हो चुकी है। यह जानकारी पेंटागन के अधिकारियों के हवाले से सामने आई है, हालांकि अमेरिका ने इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं।
बढ़ता जा रहा है क्षेत्रीय तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.





