नई दिल्ली। देशभर में NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल के मामलों को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार आज संसद में बड़ा कदम उठाने जा रही है। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, पेपर लीक पर सख्त रोक लगाना और दोषियों के खिलाफ तेज व कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सदन में यह विधेयक पेश करेंगे। सरकार इसे केवल पेश ही नहीं करेगी, बल्कि इस पर चर्चा के बाद पारित कराने का भी प्रयास करेगी। जानकारी के मुताबिक इस महत्वपूर्ण विधेयक पर लोकसभा में लगभग 8 से 10 घंटे तक विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई युवा सांसद अपनी बात रखेंगे।
क्या है विधेयक का उद्देश्य?
यह संशोधन पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अधिनियम, 2024 को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लाया जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत पेपर लीक, संगठित नकल, परीक्षा केंद्रों की मिलीभगत और परीक्षा से जुड़े अन्य फर्जीवाड़ों पर कानूनी शिकंजा और मजबूत किया जाएगा। साथ ही जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की संभावना है।
विपक्ष भी रहेगा हमलावर
विधेयक पेश होने के साथ ही विपक्ष सरकार को NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की खामियों पर घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस सांसदों ने परीक्षा से जुड़े मुद्दों और छात्रों के आंदोलन पर चर्चा की मांग उठाई है। ऐसे में सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
पीएम मोदी ने दिए थे सुधार के संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, भरोसेमंद और तकनीक आधारित बनाने की बात कही थी। इसके लिए सरकार ने विशेषज्ञों की एक हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन भी किया है, जो परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों का रोडमैप तैयार करेगी।
छात्रों की उम्मीदें बढ़ीं
लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। ऐसे में केंद्र सरकार का यह संशोधन विधेयक परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें लोकसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं कि चर्चा के दौरान क्या बदलाव सुझाए जाते हैं और यह विधेयक कब तक कानून का रूप लेता है।





