रायपुर। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है।
जानकारी के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल से रायपुर स्थित ED के जोनल कार्यालय में पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। उनकी गिरफ्तारी को छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
₹2,883 करोड़ से अधिक के कथित अपराध की जांच
ED की जांच के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2023 के बीच शराब कारोबार में कथित तौर पर एक सिंडिकेट सक्रिय था। एजेंसी का आरोप है कि शराब की खरीद में कथित तौर पर ऊंची दरें तय करने, बिना हिसाब-किताब वाली शराब के उत्पादन और FL-10A लाइसेंस के जरिए कमीशन वसूली जैसे तरीकों से करीब ₹2,883 करोड़ से अधिक की अपराध से अर्जित राशि तैयार हुई।
जांच एजेंसी का दावा है कि रामगोपाल अग्रवाल ने कथित तौर पर शराब कारोबार से जुड़े लोगों और डिस्टिलरी से कमीशन इकट्ठा करने तथा उसे सिंडिकेट के कथित प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। एजेंसी ने उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद कुछ संपत्तियों को भी कथित आय से संबंधित बताते हुए कार्रवाई की है।
₹1,000 करोड़ से अधिक की संपत्तियों पर कार्रवाई
ED के मुताबिक, इस मामले में मई 2026 में जारी तीन Provisional Attachment Orders के तहत ऐसी संपत्तियों पर कार्रवाई की गई, जिनकी बाजार कीमत ₹1,000 करोड़ से अधिक आंकी गई है, जबकि उनका डीड वैल्यू करीब ₹200 करोड़ बताया गया है।
जांच के दौरान गोवा स्थित एक होटल समेत कई संपत्तियों और बैंक खातों, शेयरों तथा म्यूचुअल फंड से जुड़ी वित्तीय परिसंपत्तियों पर भी कार्रवाई की गई है। एजेंसी ने कुछ कंपनियों पर कथित तौर पर शराब सिंडिकेट को अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा देने के लिए दबाव बनाए जाने का भी आरोप लगाया है।
पहले भी जांच के घेरे में रहे हैं अग्रवाल
रामगोपाल अग्रवाल इससे पहले भी छत्तीसगढ़ के कथित कोयला लेवी, शराब और कस्टम मिलिंग से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों के सवालों के घेरे में रहे हैं। जुलाई 2026 में छत्तीसगढ़ EOW ने उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।
हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत द्वारा किया जाना बाकी है। कांग्रेस की ओर से पूर्व में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दुर्भावना के आरोप लगाए गए हैं।
फिलहाल ED की कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच एक बार फिर सुर्खियों में है और आने वाले दिनों में मामले में और गिरफ्तारियां या संपत्तियों पर कार्रवाई होने की संभावना पर नजर बनी हुई है।



