बिना सहमति पर्सनल लोन देने के आरोप पर हाईकोर्ट सख्त, रिकवरी एजेंटों की कार्रवाई पर लगाई रोक

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बिलासपुर, 18 अगस्त 2026। बिना सहमति पर्सनल लोन स्वीकृत किए जाने और बाद में रिकवरी एजेंटों द्वारा कथित रूप से परेशान किए जाने के मामलों में बिलासपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने संबंधित बैंकों और रिकवरी एजेंटों को अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।

दोनों मामलों में याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने सीमित राशि के पर्सनल लोन के लिए अपने दस्तावेज और ओटीपी साझा किए थे, लेकिन उनकी जानकारी और सहमति के बिना अलग-अलग वित्तीय संस्थानों से बड़ी रकम के कई लोन स्वीकृत कर दिए गए।

स्टाफ नर्स ने 5.40 लाख रुपये के लोन की दी थी सहमति

पहला मामला सिम्स में पदस्थ स्टाफ नर्स वर्षा बेक से जुड़ा है। याचिका के मुताबिक, अप्रैल 2023 में स्पैश एडवाइजर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्ट सेलिंग एजेंट मनोज कुमार भगत ने उन्हें फोन कर पर्सनल लोन दिलाने का प्रस्ताव दिया था।

याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्होंने केवल आदित्य बिड़ला कैपिटल से 5.40 लाख रुपये का लोन लेने की सहमति दी थी। आरोप है कि इसके बाद उनकी जानकारी और सहमति के बिना विभिन्न वित्तीय संस्थानों से कुल करीब 46.20 लाख रुपये के कई पर्सनल लोन स्वीकृत करा दिए गए।

50 फीसदी राशि ट्रांसफर करने का लगाया आरोप

वर्षा बेक ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने लोन को लेकर आपत्ति जताई तो डायरेक्ट सेलिंग एजेंट ने कथित तौर पर लोन की 50 प्रतिशत राशि अपने खातों में ट्रांसफर करने को कहा। साथ ही ईएमआई का भुगतान खुद करने का भरोसा दिलाया गया।

कुछ समय तक ईएमआई का भुगतान किए जाने के बाद कथित तौर पर भुगतान बंद हो गया। इसके बाद रिकवरी एजेंटों द्वारा उन्हें और उनके परिवार को परेशान किए जाने का आरोप लगाया गया।

आयुर्वेद कॉलेज कर्मचारी ने भी लगाया समान आरोप

दूसरा मामला आयुर्वेद कॉलेज कर्मचारी हरि लाल पोया से संबंधित है। उनकी याचिका के अनुसार, सितंबर 2023 में स्पैश एडवाइजर प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्ट सेलिंग एजेंट पूजा यादव ने उन्हें पर्सनल लोन दिलाने का प्रस्ताव दिया था।

हरि लाल पोया का कहना है कि उन्होंने केवल चोला मंडलम से 5 लाख रुपये का लोन लेने की सहमति दी थी। आरोप है कि उनकी सहमति के बिना अलग-अलग वित्तीय संस्थानों से कुल 95,31,680 रुपये के कई पर्सनल लोन स्वीकृत कर दिए गए।

अगली सुनवाई तक कार्रवाई पर रोक

दोनों मामलों की सुनवाई न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की अदालत में हुई। कोर्ट ने संबंधित बैंकों और रिकवरी एजेंटों को अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने सभी संबंधित प्रतिवादियों को मुख्य याचिका और अंतरिम आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

अब मामले में बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों का जवाब अहम होगा। अगली सुनवाई में कोर्ट के रुख से यह स्पष्ट होगा कि कथित तौर पर बिना सहमति स्वीकृत किए गए लोन और रिकवरी प्रक्रिया को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।

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