अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में राजीव गांधी शिक्षा मिशन के कथित फर्नीचर घोटाले मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। करीब 15 साल पुराने इस मामले की लंबी जांच के बाद ACB ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।
2011-12 की फर्नीचर खरीदी में सामने आई थी गड़बड़ी
मामला वर्ष 2011-12 का है। उस दौरान राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत स्कूलों और अन्य संस्थानों के लिए फर्नीचर की खरीदी की गई थी। इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आए थे।
शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच के दौरान फर्नीचर खरीदी और सप्लाई से जुड़ी कथित अनियमितताओं के कई तथ्य सामने आए।
रिकॉर्ड खंगालने के बाद ACB ने की गिरफ्तारी
ACB की टीम ने करीब दो महीने पहले संबंधित कार्यालयों में पहुंचकर फर्नीचर खरीदी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की थी। इस दौरान हार्ड कॉपी रिकॉर्ड के साथ डिजिटल दस्तावेज भी जब्त किए गए थे।
जांच में मिले दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर अब आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार आरोपियों में राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी एसपी पाण्डेय और दर्शन फेब्रिकेशन फर्म के प्रोपराइटर संजय पटेल समेत तीन लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
कई अधिकारियों और फर्मों की भूमिका जांच के घेरे में
ACB की जांच में विभाग के करीब 6 से 7 अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात सामने आई है। इसके अलावा फर्नीचर की खरीदी और सप्लाई से जुड़ी करीब 12 फर्मों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका रही और पूरी प्रक्रिया में नियमों का किस स्तर पर उल्लंघन हुआ।
IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला
मामले में ACB ने IPC की धारा 420 और 120(B) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) और 13(2) के तहत कार्रवाई की है।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। ACB जब्त दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।



