नई दिल्ली। देशभर में चीनी की कीमतों में बीते एक महीने के दौरान तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। जुलाई के मध्य में जहां चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48.18 प्रति किलो थी, वहीं अगस्त के तीसरे सप्ताह तक यह बढ़कर ₹55.70 से ₹58.20 प्रति किलो तक पहुंच गई। कई शहरों में खुदरा कीमत ₹62 से ₹65 प्रति किलो और कुछ बाजारों में ₹68-70 प्रति किलो तक पहुंचने की जानकारी है।
इस तरह करीब एक महीने में चीनी की औसत कीमत में लगभग 20 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। त्योहारों का सीजन करीब आने के साथ मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव बने रहने की चिंता भी जताई जा रही है।
एक महीने में ऐसे बढ़े चीनी के दाम
20 जुलाई 2026: औसत खुदरा कीमत करीब ₹48.18 प्रति किलो
20 अगस्त 2026: कीमत बढ़कर करीब ₹55.70 प्रति किलो
21 अगस्त 2026: औसत कीमत करीब ₹58.20 प्रति किलो
कुछ बाजारों में: खुदरा भाव ₹62-65 और कुछ जगहों पर ₹68-70 प्रति किलो तक
वहीं, कुछ बाजारों में थोक कीमतें भी करीब ₹5,500 से ₹6,500 प्रति क्विंटल तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
क्या एथेनॉल है चीनी महंगी होने की वजह?
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन को भी इसकी एक वजह बताया जा रहा था। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इसे हालिया कीमत बढ़ोतरी का प्रमुख कारण मानने से इनकार किया गया है।
सरकार के मुताबिक, एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 फीसदी था, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 फीसदी रह गया है। वहीं, एथेनॉल उत्पादन में अनाज, खासकर मक्का, की हिस्सेदारी बढ़ी है।
चीनी के दाम बढ़ने की 5 बड़ी वजहें
- चीनी उत्पादन में कमी
इस सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान पहले करीब 343 लाख टन लगाया गया था, जिसे घटाकर लगभग 306 लाख टन कर दिया गया है। यानी उत्पादन अनुमान में करीब 11 फीसदी की कमी आई है।
- मौसम और फसल में बीमारी
गन्ने की फसल पर रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के असर के साथ-साथ अधिक बारिश और जलभराव ने भी उत्पादन को प्रभावित किया है। इसका असर चीनी की उपलब्धता पर पड़ रहा है।
- त्योहारों से पहले बढ़ी मांग
रक्षाबंधन के बाद आने वाले दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के चलते मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने लगी है। त्योहारों के दौरान चीनी की खपत बढ़ने से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।
- वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की उपलब्धता को लेकर दबाव है। वैश्विक कीमतों में करीब 16 फीसदी तक बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ रहा है।
- जमाखोरी और सट्टेबाजी की आशंका
सरकार ने कीमतों में तेजी के बीच जमाखोरी और सट्टेबाजी पर भी नजर बढ़ाई है। कुछ व्यापारियों और मिलों द्वारा स्टॉक रोककर रखने की आशंका के चलते स्टॉक लिमिट जैसे कदम उठाए गए हैं।
सरकार ने उठाए ये कदम
चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को 31 अक्टूबर तक मंजूरी देना शामिल है।
इसके अलावा डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट तय की गई है। बड़े उपभोक्ताओं को 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक रखने पर भी रोक लगाई गई है। सरकार की ओर से चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक की जांच और जल्द क्रशिंग शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
त्योहारों में और महंगी होगी चीनी?
चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार के आयात और स्टॉक नियंत्रण जैसे कदमों से बाजार में कीमतें कब तक नियंत्रित होंगी। अगर घरेलू आपूर्ति में सुधार होता है तो आने वाले दिनों में दामों पर दबाव कम हो सकता है।



