रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी प्रोफेसर समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम ने लगातार करीब 36 घंटे तक तकनीकी और मैदानी जांच के बाद पेपर लीक की पूरी कड़ी का खुलासा किया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि मामले का कथित मास्टरमाइंड दुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया है। आरोप है कि उसने प्रश्नपत्र के लिफाफे के साथ छेड़छाड़ कर मोबाइल से प्रश्नपत्र की रिकॉर्डिंग की और बाद में उसे कॉलेज के छात्रों को बेच दिया।
परीक्षा से पहले WhatsApp पर वायरल हुआ था पेपर
मामला 20 अगस्त 2026 को होने वाली बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर के एजीसीएच-221 (कीटशास्त्र) विषय की परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक होनी थी।
पुलिस के अनुसार, परीक्षा शुरू होने से पहले ही सुबह करीब 8:41 बजे पेपर लीक होने की सूचना मिली। इसके बाद करीब 8:54 बजे संबंधित अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई। छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने WhatsApp के जरिए प्रश्नपत्र के कुछ कंटेंट वायरल होने की सूचना विश्वविद्यालय को दी थी।
प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की पुष्टि के बाद विश्वविद्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा थाना पुलिस समेत 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम गठित की गई। जांच टीमों ने रायपुर के अलावा दुर्ग, कबीरधाम, बिलासपुर और आसपास के इलाकों में दबिश दी।
साइबर टीम ने वायरल प्रश्नपत्र, स्क्रीनशॉट, फोटो, मैसेज और सोशल मीडिया पोस्ट की तकनीकी जांच की। पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस मोबाइल नंबर, अकाउंट या डिजिटल माध्यम से वायरल हुआ।
तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस टीम दुर्ग निवासी अनुज मिंज तक पहुंची। इसके बाद पूछताछ और मिले साक्ष्यों के आधार पर पेपर लीक की पूरी कड़ी सामने आई।
प्रोफेसर ने ऐसे निकाला प्रश्नपत्र का फोटो
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया वर्ष 2019 से भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में पदस्थ है। पिछले करीब एक साल से वह अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त करने के लिए कृषि महाविद्यालय रायपुर आता था।
पुलिस के मुताबिक, 17 अगस्त 2026 को आरोपी उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के लिए जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय पहुंचा था। वहां से उसने आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त किए। इसके बाद सभी प्रश्नपत्र कॉलेज में रखने के बजाय उसने 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र अपने घर ले जाने का आरोप है।
जांच में आरोप है कि आरोपी ने लिफाफे में सुई और नुकीले उपकरण से छोटा छेद किया। इसके बाद मोबाइल कैमरे की मदद से प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग की और उसकी सामग्री की नकल तैयार की।
11 हजार रुपए में छात्रों को बेचा प्रश्नपत्र
पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रोफेसर ने प्रश्नपत्र की सामग्री को अपने कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को कुल 11 हजार रुपए में बेच दिया।
इसके बाद अजय नायक ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू तक पहुंचाया। पुलिस ने इस पूरी श्रृंखला की जांच के बाद छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों के पास से ये सामान जब्त
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सामान जब्त किए हैं। इनमें:
11 हजार रुपए की नगदी
6 मोबाइल फोन
वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस
केबल और मोबाइल कनेक्टर
सुई और सूजा
कॉपी
फेविकोल
शामिल हैं।
दो आरोपी अभी फरार
पुलिस के मुताबिक, मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार काम कर रही हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पेपर लीक नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और उनकी भूमिका का पता लगाया जा रहा है।
तेलीबांधा थाने में दर्ज है मामला
इस मामले में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. एन.आर. रंगारे की शिकायत पर तेलीबांधा थाने में FIR दर्ज की गई थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 की संबंधित धाराओं और BNS की धारा 316 के तहत अपराध दर्ज किया है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ पेपर लीक में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।



