महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से विकास के दावों को आईना दिखाती तस्वीर सामने आई है। बसना विकासखंड के ग्राम पंचायत लम्बर के आश्रित गांव छिर्राबहारा में करीब 700 की आबादी आज भी नदी पार करने के लिए बांस और बल्लियों से बने अस्थायी पुल का सहारा लेने को मजबूर है। हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों की इस समस्या के समाधान के लिए करीब 3 करोड़ 1 लाख रुपये की लागत से 45 मीटर लंबे पुल का निर्माण स्वीकृत है, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है।
बांस के पुल से नदी पार करने की मजबूरी
बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ग्रामीणों की परेशानी भी बढ़ जाती है। गांव से बाहर जाने के लिए लोगों को इसी नदी को पार करना पड़ता है। बच्चों को स्कूल जाना हो, ग्रामीणों को बाजार पहुंचना हो या किसी मरीज को अस्पताल ले जाना हो, सभी के लिए यही रास्ता मुख्य सहारा है।
पक्का पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने अपनी मेहनत से बांस और बल्लियों की मदद से एक अस्थायी पुल तैयार किया है। हालांकि यह जुगाड़ का पुल बारिश के मौसम में बेहद खतरनाक हो जाता है। फिसलन और तेज बहाव के बीच इस रास्ते से गुजरते समय किसी भी वक्त हादसा होने का खतरा बना रहता है।
3 करोड़ से ज्यादा की राशि स्वीकृत, फिर भी निर्माण अधूरा
ग्रामीणों के मुताबिक उनकी समस्या को देखते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 45 मीटर लंबे पुल के निर्माण के लिए 301.68 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यानी पुल निर्माण पर करीब 3 करोड़ 1 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं।
जानकारी के अनुसार निर्माण कार्य शुरू करने की निर्धारित तारीख 1 अप्रैल 2026 थी। लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी पुल का निर्माण अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद धीमी है और अब तक पुल की नींव का काम भी पूरा नहीं हो सका है।
स्कूली बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा
बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा चिंता स्कूली बच्चों को लेकर है। रोजाना इसी अस्थायी रास्ते से बच्चों को नदी पार करनी पड़ती है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर बांस और लकड़ी से बना यह पुल और भी जोखिम भरा हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब पुल के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है और निर्माण की तारीख भी तय की जा चुकी है, तो फिर काम में इतनी देरी क्यों हो रही है? लोगों ने जल्द से जल्द पक्के पुल का निर्माण पूरा कराने की मांग की है, ताकि उन्हें जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े।
ग्रामीणों का सवाल—आखिर कब बनेगा पक्का पुल?
एक तरफ सरकारी योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण आज भी बांस के अस्थायी पुल के भरोसे हैं। अब ग्रामीणों को इंतजार है कि जिम्मेदार विभाग और निर्माण एजेंसी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए पक्के पुल का निर्माण जल्द पूरा कराए, ताकि बारिश के दिनों में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।



