रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में गिरफ्तार आयोग के पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का प्रश्नपत्र लीक करना समाज और व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर अपराध है, क्योंकि इससे लाखों युवाओं के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि “प्रश्नपत्र लीक करना हत्या से भी बड़ा अपराध है, क्योंकि इसका दुष्प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।” अदालत ने यह भी कहा कि जब परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर होती है, वही उसका उल्लंघन करें तो न्याय व्यवस्था और युवाओं का भरोसा दोनों प्रभावित होते हैं।
सीबीआई जांच में सामने आए अहम तथ्य
सीबीआई जांच के अनुसार, वर्ष 2021 की CGPSC राज्य सेवा मुख्य परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव के पास थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे सुमित ध्रुव तक पहुंचाए।
मामले की जांच के दौरान सीबीआई ने ध्रुव के भिलाई स्थित आवास पर छापेमारी की, जहां से जनरल स्टडीज (पेपर-7) के उत्तर और निबंध (पेपर-2) से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि पेपर-7 के कुल 47 प्रश्नों में से 42 प्रश्न जब्त दस्तावेजों से मेल खाते हैं। सीबीआई ने इसे मामले का महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है।
कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?
बचाव पक्ष ने जमानत के पक्ष में कई दलीलें पेश कीं, लेकिन हाई कोर्ट ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और लोकसेवक से निष्पक्षता, पारदर्शिता और ईमानदारी की सर्वोच्च अपेक्षा होती है। यदि ऐसा अधिकारी ही परीक्षा की गोपनीयता भंग करने का आरोपी हो, तो यह गंभीर विश्वासघात की श्रेणी में आता है।
इन्हीं तथ्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही पूर्व आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को फिलहाल जेल में ही रहना होगा, जबकि मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी।



