बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की स्टेटस रिपोर्ट जारी की है। जुलाई 2026 तक की स्थिति पर आधारित इस रिपोर्ट में प्रदेश के अलग-अलग जिलों की निचली अदालतों में लंबित प्रकरणों की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में बिलासपुर, बलौदाबाजार, रायपुर और राजनांदगांव समेत अन्य जिलों से जुड़े मामलों का उल्लेख है।
हाईकोर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनप्रतिनिधियों से जुड़े कई आपराधिक मामलों में निचली अदालतों में सुनवाई अभी जारी है। वहीं कुछ मामलों में न्यायिक आदेशों के चलते आगे की कार्रवाई पर रोक लगी हुई है। इससे स्पष्ट है कि कई प्रकरणों में न्यायिक प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
बिलासपुर विधायक अटल श्रीवास्तव से जुड़ा मामला भी शामिल
स्टेटस रिपोर्ट में बिलासपुर विधायक अटल श्रीवास्तव से जुड़े प्रकरण का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में उनके खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले की जानकारी शामिल है। संबंधित प्रकरण में न्यायिक प्रक्रिया जारी बताई गई है।
बलौदाबाजार में भी कई मामले लंबित
रिपोर्ट में बलौदाबाजार जिले से जुड़े मौजूदा और पूर्व जनप्रतिनिधियों के मामलों को भी शामिल किया गया है। इनमें कुछ प्रकरण निचली अदालतों में लंबित हैं और उनकी सुनवाई जारी है।
रायपुर के विधायकों से जुड़े मामलों का भी जिक्र
राजधानी रायपुर के कई विधायकों से जुड़े आपराधिक प्रकरण भी स्टेटस रिपोर्ट में दर्ज हैं। इनमें कुछ मामले सामान्य आपराधिक अदालतों में विचाराधीन हैं, जबकि कुछ प्रकरण ACB और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े विशेष न्यायालयों में चल रहे हैं।
राजनांदगांव के पूर्व जनप्रतिनिधियों के मामले भी शामिल
हाईकोर्ट की रिपोर्ट में राजनांदगांव से जुड़े मामलों की स्थिति भी दर्ज की गई है। इनमें पूर्व सांसद और विधायकों से संबंधित लंबित प्रकरण शामिल हैं। रिपोर्ट में पूर्व सांसद मधुसूदन यादव से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया गया है।
कई मामलों में अभी जारी है न्यायिक प्रक्रिया
हाईकोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट से सामने आया है कि सांसदों और विधायकों से जुड़े कई आपराधिक मामलों में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। कुछ मामलों में सुनवाई चल रही है, जबकि कुछ प्रकरण विभिन्न न्यायिक आदेशों के कारण फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
जिला और न्यायालयवार सामने आई स्थिति
जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की यह स्टेटस रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्रदेश में सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की जिला-वार और न्यायालय-वार स्थिति सामने आती है। हालांकि, किसी मामले का लंबित होना अपने आप में संबंधित जनप्रतिनिधि के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाएगा।



