भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में नया दावा, दोस्त ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

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आरा। भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में एक नया विवाद सामने आया है। भरत तिवारी के करीबी मित्र लखन कुमार ने पुलिस कार्रवाई और उपचार प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि एनकाउंटर के बाद घायल भरत तिवारी की स्थिति उतनी गंभीर नहीं थी, जितनी बाद में बताई गई, और उनकी मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अस्पताल पहुंचने तक स्थिति सामान्य होने का दावा

एक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म से बातचीत में लखन कुमार ने कहा कि एनकाउंटर की सूचना मिलने के बाद वह अपने साथियों के साथ घटनास्थल पहुंचे और घायल भरत तिवारी के साथ शाहपुर अस्पताल से लेकर आरा तक मौजूद रहे। उनके अनुसार, शाहपुर अस्पताल में भर्ती के दौरान भरत तिवारी की हालत स्थिर दिखाई दे रही थी और चिकित्सकों ने भी तत्काल कोई गंभीर खतरा नहीं बताया था।

लखन का कहना है कि उस समय भरत तिवारी बातचीत करने की स्थिति में थे, जिससे उन्हें उम्मीद थी कि उचित इलाज मिलने पर उनकी जान बचाई जा सकती थी।

रास्ते में क्या हुआ? उठ रहे हैं सवाल

लखन कुमार ने दावा किया कि शाहपुर से आरा ले जाने के दौरान ऐसी परिस्थितियां बनीं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने आशंका जताई कि भरत तिवारी को लगी गंभीर चोटों और बाद में बिगड़ी हालत के पीछे कुछ ऐसे तथ्य हो सकते हैं, जो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं।

हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य या आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया है। इसलिए उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

इलाज में देरी को लेकर भी सवाल

लखन कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि घायल को समय रहते बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका कहना है कि यदि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को सीधे किसी बड़े और उन्नत चिकित्सा केंद्र में पहुंचाया जाता, तो परिणाम अलग हो सकते थे।

उन्होंने मांग की कि पूरे घटनाक्रम, चिकित्सा उपचार और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि मौत की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें।

पुलिस की प्रतिक्रिया का इंतजार

इस मामले में अब तक पुलिस प्रशासन की ओर से लखन कुमार द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, एनकाउंटर और उसके बाद हुई मौत को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं जारी हैं।

फिलहाल मामले से जुड़े दावों और आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है।

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