नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली और कानूनी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
केजरीवाल ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में जांच पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि अब तक इस मामले में कोई औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जांच दल किस कानूनी आधार पर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है।
जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल
AAP प्रमुख ने कहा कि किसी भी वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन बेहद आवश्यक होता है। उन्होंने मांग की कि जांच से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं ताकि लोगों के बीच किसी प्रकार की शंका की स्थिति न बने।
उन्होंने कहा कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दी गई दान राशि केवल आर्थिक विषय नहीं है, बल्कि यह देशभर के करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास से भी जुड़ा हुआ मामला है। ऐसे में जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न होनी चाहिए।
सरकार ने जांच को बताया नियमसम्मत
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि जांच निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप आगे बढ़ रही है। सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय SIT अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप चुकी है और मामले के विभिन्न पहलुओं की गहन समीक्षा जारी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार जांच का उद्देश्य तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल करना है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी दस्तावेजों एवं संबंधित पक्षों की जानकारी का परीक्षण किया जा रहा है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच जांच पर नजर
मामले को लेकर विपक्ष लगातार जांच की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार निष्पक्ष जांच का दावा कर रही है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।





