रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी और रायपुर ग्रामीण की दोहरी पुलिस व्यवस्था लागू होने के महज 179 दिनों के भीतर ही इसके व्यावहारिक और प्रशासनिक दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। कानून-व्यवस्था, वीआईपी ड्यूटी, तबादलों और प्रशासनिक समन्वय में आ रही कठिनाइयों के बाद अब पूरे जिले में एक समान पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज हो गई है।सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री विजय शर्मा पूरे जिले में कमिश्नरी प्रणाली लागू करने के पक्ष में हैं और इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री स्तर पर भी सहमति बन चुकी है। शासन अगस्त तक इस संबंध में घोषणा कर सकता है।
डीजीपी की रिपोर्ट में दोहरी व्यवस्था पर चिंता
डीजीपी अरुणदेव गौतम द्वारा गठित एडीजी स्तर की उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पर्याप्त पुलिस बल और संसाधनों के बिना एक ही जिले में दो अलग-अलग पुलिस व्यवस्थाएं संचालित करना व्यवहारिक नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे पुलिसिंग की गुणवत्ता प्रभावित होगी और अलग ढांचा खड़ा करने में सरकारी खजाने पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ेगा। समिति ने पूरे रायपुर जिले में एकीकृत पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की है।
जनप्रतिनिधियों और विधायकों ने भी उठाए सवाल
रायपुर के जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे जिले में समान पुलिस व्यवस्था लागू करने की मांग की है। वहीं, वरिष्ठ विधायक भोलाराम साहू ने विधानसभा में दोहरी व्यवस्था के कारण गलत जवाब प्रस्तुत होने पर गृह मंत्री को पत्र लिखकर चिंता जताई है।
दोहरी पुलिसिंग से सामने आईं प्रमुख समस्याएं
- विधानसभा में भ्रम: अलग-अलग प्रशासनिक सीमाओं के कारण विधानसभा में गलत जानकारी प्रस्तुत होने की स्थिति बनी।
- तबादलों में जटिलता: एक ही जिले के भीतर सिपाही और हवलदार के स्थानांतरण के लिए भी डीजीपी स्तर तक फाइल भेजनी पड़ रही है। शासन की मंजूरी के बिना नवा रायपुर के पुलिसकर्मियों की शहर में पदस्थापना संभव नहीं है।
- संवेदनशील क्षेत्रों का बंटवारा: एयरपोर्ट, विधानसभा और मंत्रालय जैसे अति संवेदनशील वीवीआईपी क्षेत्र ग्रामीण पुलिस के अधीन हैं, जबकि ग्रामीण एसपी और आईजी कार्यालय कमिश्नरी क्षेत्र में स्थित हैं। कई वार्ड और पंचायतें भी अधिसूचना के विपरीत विभाजित हैं।
- पुलिसिंग पर असर: पुलिस मुख्यालय की 100 दिनों की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार कमिश्नरी क्षेत्र में अपराध नियंत्रण और कार्रवाई बेहतर हुई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिंग कमजोर होने और अपराध बढ़ने की स्थिति सामने आई है।
अलग ग्रामीण पुलिस जिला बनाने पर 50 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च
यदि दोहरी व्यवस्था जारी रहती है तो रायपुर ग्रामीण के लिए अलग पुलिस ढांचा तैयार करना होगा। शुरुआती अनुमान के अनुसार इस पर 50 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा।फिलहाल ग्रामीण एसपी संभागीय आयुक्त कार्यालय से अस्थायी रूप से कार्य कर रही हैं, जबकि तीनों अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों के पास भी स्थायी कार्यालय नहीं हैं। भविष्य में एसपी कार्यालय, पुलिस लाइन, आवासीय परिसर, महिला थाना, अजाक थाना, क्राइम ब्रांच, ट्रैफिक शाखा और अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण और भर्ती करनी होगी।
अगस्त में हो सकती है बड़ी घोषणा
प्रशासनिक रिपोर्ट, जनप्रतिनिधियों की मांग और आर्थिक पहलुओं को देखते हुए सरकार अब पूरे रायपुर जिले में एकीकृत पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है तो अगस्त में इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
