पंजाब कांग्रेस में सियासी संग्राम तेज: चन्नी गुट ने खोला मोर्चा, बैठकों के बहिष्कार और बघेल से दूरी के संकेत

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चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर छिड़ा विवाद अब खुली सियासी लड़ाई का रूप लेता दिखाई दे रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाला गुट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाने की मांग पर अडिग है। सूत्रों के मुताबिक, जब तक नेतृत्व में बदलाव नहीं किया जाता, चन्नी समर्थक पार्टी की अहम बैठकों से दूरी बनाए रख सकते हैं। वहीं, पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के बहिष्कार की भी रणनीति तैयार की जा रही है।

चन्नी गुट की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह भूपेश बघेल को माना जा रहा है। दरअसल, कांग्रेस आलाकमान द्वारा एक जुलाई को राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा को नेता प्रतिपक्ष बनाए रखने के फैसले के पीछे बघेल की अहम भूमिका बताई जा रही है। इसी फैसले के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और अधिक बढ़ गया। हालांकि चन्नी को प्रचार अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन उनके समर्थक इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।

इसी बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने चरणजीत सिंह चन्नी से मुलाकात कर राजनीतिक हलचल और तेज कर दी। इस बैठक में विधायक परगट सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। बैठक के बाद सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों के साथ लिखा गया—“एकता में बल है”। राजनीतिक हलकों में इसे चन्नी गुट के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।

विवाद के बीच पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल पहली बार चंडीगढ़ पहुंचे हैं। वे संगठन में बढ़ती नाराजगी को दूर करने के लिए कार्यकारी अध्यक्षों, जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें करेंगे। हालांकि, यदि चन्नी गुट इन बैठकों से दूरी बनाता है, तो संगठन को एकजुट करने की उनकी कोशिशों को बड़ा झटका लग सकता है।

सूत्रों के अनुसार, चरणजीत सिंह चन्नी अब राहुल गांधी से सीधे मुलाकात कर अपनी बात रखना चाहते हैं और उनके विदेश से लौटने का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि पंजाब कांग्रेस का यह विवाद अब राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद ही किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है।

उधर, राजा वडिंग लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने भी चन्नी और रंधावा की मुलाकात वाली तस्वीर साझा करते हुए “एकता में बल है” का संदेश दिया। लेकिन अंदरखाने जारी खींचतान यह संकेत दे रही है कि पंजाब कांग्रेस में सब कुछ सामान्य नहीं है।

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर बढ़ता यह टकराव पार्टी की चुनावी तैयारियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब सबकी नजर राहुल गांधी की वापसी और कांग्रेस आलाकमान के अगले फैसले पर टिकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि नेतृत्व में बदलाव होता है या फिर पार्टी किसी समझौते के जरिए इस सियासी संकट को खत्म करने की कोशिश करती है।

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