मलेरिया से पीड़ित चौथी कक्षा की बच्ची की मौत, परिजनों ने कोंटा अस्पताल पर लगाया लापरवाही का आरोप

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सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा से एक दुखद मामला सामने आया है। कोंटा अस्पताल में मलेरिया से पीड़ित चौथी कक्षा की बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। बच्ची की हालत बिगड़ने के बाद उसे बेहतर उपचार के लिए सुकमा रेफर किया गया था, लेकिन अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

बच्ची की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी है। परिवार ने कोंटा अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, बच्ची की मौत की वास्तविक वजह और इलाज के दौरान किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

करीब दो दिन चला इलाज, तीसरे दिन बिगड़ी हालत

परिजनों के मुताबिक, मलेरिया से पीड़ित बच्ची को उपचार के लिए कोंटा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब दो दिन तक उसका इलाज चला। तीसरे दिन अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए सुकमा रेफर कर दिया।

परिवार बच्ची को लेकर सुकमा के लिए रवाना हुआ, लेकिन रास्ते में ही उसकी हालत गंभीर हो गई और उसने दम तोड़ दिया।

मौत के बाद अस्पताल पहुंचे परिजन

बच्ची की मौत की खबर के बाद परिजन और ग्रामीण कोंटा अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल की उपचार व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि बच्ची को समय पर जरूरी इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल सकीं।

परिजनों का कहना है कि यदि बच्ची की हालत बिगड़ने से पहले उचित उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

BMO और प्रशासनिक अधिकारियों ने ली जानकारी

मामले की जानकारी मिलने के बाद कोंटा अस्पताल में BMO और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में चर्चा हुई। अधिकारियों ने परिजनों की शिकायत और अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गए आरोपों की जानकारी ली।

प्रशासन की ओर से मामले के तथ्यों की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि बच्ची को किस स्थिति में अस्पताल लाया गया था, उसे क्या उपचार दिया गया और हालत बिगड़ने के बाद रेफर करने का निर्णय कब लिया गया।

जांच के बाद स्पष्ट होगी लापरवाही की सच्चाई

परिजनों और ग्रामीणों ने मांग की है कि बच्ची के इलाज से जुड़े पूरे रिकॉर्ड की जांच की जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया और जरूरी सुविधाओं का पालन किया गया था या नहीं।

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