जांजगीर-चांपा। जिले में काले कागज को कथित तौर पर असली नोट में बदलने का झांसा देकर ठगी करने की कोशिश का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए एक व्यक्ति से संपर्क कर उसे अपने जाल में फंसाने की कोशिश की और कथित तौर पर 50 हजार रुपये की मांग की थी। हालांकि, पुलिस की सक्रियता के चलते पीड़ित ठगी का शिकार होने से बच गया।
Facebook-Instagram के जरिए बनाते थे लोगों को निशाना
पुलिस के अनुसार, आरोपी Facebook और Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद काले कागज को विशेष प्रक्रिया के जरिए असली नोट में बदलने का झांसा देकर उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश की जाती थी।
मामले की जानकारी नवागढ़ क्षेत्र के तेरस राम पाल महिपाल ने पुलिस को दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और संदिग्धों तक पहुंचकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरोह के मास्टरमाइंड पर पहले भी दर्ज हो चुके हैं मामले
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार आरोपी शिव प्रसाद मनहर का नाम पहले भी नकली नोट से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। पुलिस के मुताबिक, उसे पूर्व में जैजैपुर पुलिस और रायपुर गंज पुलिस द्वारा भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
काले कागज और केमिकल समेत मोबाइल जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सफेद केमिकल पाउडर, काले रंग का केमिकल लगा नोट जैसा दिखने वाला 6 कागज और 2 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तेरस राम ताल निवासी देवरी बिर्रा, राम रतन साहू निवासी करौबाडीह जैजैपुर और शिव प्रसाद मनहर निवासी करौहाडीह के रूप में हुई है।
BNS की धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(2) और 61(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले में पुलिस आरोपियों के सोशल मीडिया संपर्क, संभावित पीड़ितों और गिरोह के नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ और जांच के दौरान यदि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों या पुराने मामलों की जानकारी सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर ऐसे झांसे से रहें सावधान
यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए होने वाली ठगी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताता है। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा कम समय में पैसा दोगुना करने, कागज या किसी वस्तु को असली नोट में बदलने अथवा किसी अन्य अविश्वसनीय तरीके से लाभ पहुंचाने का दावा किया जाए तो बिना सत्यापन के पैसे देना नुकसानदायक हो सकता है।



