बिलासपुर, 17 अगस्त 2026। नगर निगम बिलासपुर में कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों की ओर से प्रस्तुत अभ्यावेदन पर नियमानुसार विचार करते हुए तीन महीने के भीतर तार्किक और उचित निर्णय लिया जाए।
हाईकोर्ट का यह आदेश जागेश्वर दुबे और अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। हालांकि, कोर्ट ने कर्मचारियों को सीधे नियमित करने का आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने केवल उनके लंबित अभ्यावेदन पर नियमों के तहत समयबद्ध निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
कमिश्नर के समक्ष पहले ही दिया गया था अभ्यावेदन
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर नगर निगम बिलासपुर के कमिश्नर के समक्ष पहले ही अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था। इसके बावजूद लंबे समय से उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी मांग को सीमित करते हुए हाईकोर्ट से आग्रह किया कि सक्षम प्राधिकारी को उनके लंबित अभ्यावेदन पर नियमानुसार विचार कर उचित फैसला लेने का निर्देश दिया जाए। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए तीन महीने की समयसीमा तय की है।
चार कर्मचारियों ने दायर की थी याचिका
मामले में नगर निगम बिलासपुर के चार कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। इनमें माली जागेश्वर दुबे, इलेक्ट्रीशियन चंद्र कुमार नागदौने, टाइम कीपर मिर्जा वाहिद बेग और माली पेट्रिक पास्टी शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे लंबे समय से नगर निगम में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी सेवाओं का नियमितीकरण नहीं किया गया। उन्होंने नियमितीकरण नहीं किए जाने को मनमाना बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के उल्लंघन का भी हवाला दिया।
2008 के परिपत्र का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2008 के परिपत्र का भी उल्लेख किया गया। उनका तर्क था कि समान परिस्थितियों में काम कर रहे और उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों को यदि नियमितीकरण का लाभ दिया गया है, तो उन्हें भी उसी आधार पर नियमितीकरण का लाभ मिलना चाहिए।
हालांकि, सुनवाई के दौरान कर्मचारियों ने फिलहाल हाईकोर्ट से सीधे नियमितीकरण का आदेश देने के बजाय सक्षम प्राधिकारी को उनके अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की।
तीन महीने में लेना होगा फैसला
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब संबंधित सक्षम प्राधिकारी को कर्मचारियों के लंबित अभ्यावेदन पर लागू नियमों और सभी संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होगा।
कोर्ट के इस आदेश से नियमितीकरण की मांग कर रहे नगर निगम कर्मचारियों को अपने मामले पर समयबद्ध फैसला मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, नियमितीकरण का अंतिम लाभ मिलेगा या नहीं, यह सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगा।



