CG: झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार, 3 साल के बच्चे की मौत के बाद क्लीनिक सील

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बलरामपुर, 21 अगस्त 2026। जिले में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद तीन साल के बच्चे की मौत के मामले में पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। बच्चे की मौत के बाद पुलिस ने आरोपी डॉक्टर बालेश्वर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने उसके द्वारा संचालित क्लीनिक को सील कर दिया है।

मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के सरना डीह गांव का है। यहां कथित तौर पर बिना वैध अनुमति के क्लीनिक संचालित किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टर ने तीन साल के बच्चे को इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

इंजेक्शन लगाने के बाद बिगड़ी बच्चे की हालत

जानकारी के अनुसार, तीन साल के बच्चे को इलाज के लिए सरना डीह स्थित क्लीनिक ले जाया गया था। आरोप है कि वहां डॉक्टर बालेश्वर सिंह ने बच्चे को इंजेक्शन लगाया। इसके बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और कुछ समय बाद बच्चे की मौत हो गई।

बच्चे की मौत की खबर सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।

आरोपी डॉक्टर गिरफ्तार, क्लीनिक सील

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने आरोपी डॉक्टर बालेश्वर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही सरना डीह गांव में संचालित उसके क्लीनिक को भी सील कर दिया गया है।

पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। बच्चे की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और इलाज के दौरान किस तरह की चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई गई, इसकी भी जांच की जा रही है।

अवैध क्लीनिकों पर निगरानी को लेकर सवाल

इस घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कथित अवैध क्लीनिकों और बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता के इलाज करने वालों पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीण इलाकों में ऐसे क्लीनिकों के संचालन की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।

तीन साल के बच्चे की मौत के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि सरना डीह में कथित रूप से बिना वैध अनुमति संचालित क्लीनिक की जानकारी संबंधित विभाग को पहले क्यों नहीं हुई और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

फिलहाल आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी और क्लीनिक सील किए जाने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही बच्चे की मौत के वास्तविक कारणों और मामले में जिम्मेदारी तय होने की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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