छत्तीसगढ़ में कथित ₹3,000 करोड़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में, ED की टीम ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के धमतरी स्थित आवास पर दबिश दी है।
कार्रवाई से जुड़ी मुख्य बातें
- ED की रेड: धमतरी स्थित उनके घर पर करीब 8 अधिकारियों की टीम ने दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन छानबीन की।
- शराब घोटाले से कनेक्शन: केंद्रीय जांच एजेंसी का आरोप है कि इस कथित घोटाले से जुड़े लगभग ₹72 करोड़ (और कुल कथित ₹3,000 करोड़ के सिंडिकेट) की अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाया गया था।
- राजीव भवन तक नकदी पहुंचाने का आरोप: ED की जांच और गवाहों के बयानों के अनुसार, अवैध शराब के कारोबार से जुटाई गई बेहिसाब नकदी को रायपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय ‘राजीव भवन’ पहुंचाया जाता था, जहां यह रकम अग्रवाल के निर्देशों पर प्रबंधित की जाती थी।
पूछताछ में टालमटोल: एजेंसी का दावा है कि समन भेजने के बावजूद वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और उनके जवाब संतोषजनक नहीं थे।
मामला और अन्य आरोपी
- गिरफ्तारी और रिमांड: छत्तीसगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा पहले की गई कार्रवाई के बाद, ED ने उन्हें रायपुर सेंट्रल जेल से औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया था और अदालत से उनकी रिमांड पर पूछताछ की जा रही है।
- सिंडिकेट और अन्य नाम: ED के अनुसार, यह कथित घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ था। इस मामले में अब तक 7 आरोपपत्र (Chargesheets) दाखिल किए जा चुके हैं और लगभग 85 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, और अन्य प्रमुख हस्तियों के नाम भी शामिल हैं।
फिलहाल ED की टीम घर के अंदर मिले दस्तावेजों और सबूतों की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस अवैध वित्तीय नेटवर्क के अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके। इस मामले से जुड़े विस्तृत अपडेट्स और आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों के लिए आप Enforcement Directorate Official Website पर जा सकते हैं।
क्या आप इस मामले या जांच से जुड़ी किसी अन्य विशेष जानकारी के बारे में जानना चाहते हैं?



