नई दिल्ली: भारतीय फार्मास्युटिकल बाजार ने जुलाई 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। PharmaTrac के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय फार्मा मार्केट में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत से अधिक की वैल्यू ग्रोथ दर्ज की गई। हालांकि, बाजार की वास्तविक बिक्री मात्रा यानी यूनिट ग्रोथ की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही और यह महज 1.6 प्रतिशत रही।
फार्मा बाजार में वैल्यू के स्तर पर लगातार मजबूत वृद्धि देखने को मिल रही है। इससे संकेत मिलता है कि दवाओं की कीमतों, प्रोडक्ट मिक्स और नए उत्पादों जैसे कारकों का बाजार की कुल बिक्री में अहम योगदान है। वहीं, यूनिट ग्रोथ कम रहने से यह भी संकेत मिलता है कि बिक्री की मात्रा में वृद्धि अभी उतनी तेज नहीं है।
यूनिट ग्रोथ बनी चुनौती
जुलाई में 1.6 प्रतिशत की यूनिट ग्रोथ बताती है कि बाजार का विस्तार मुख्य रूप से बिक्री मूल्य और प्रोडक्ट मिक्स से समर्थित है, जबकि दवाओं की कुल मात्रा में वृद्धि सीमित रही है। इससे फार्मा कंपनियों के लिए आने वाले महीनों में वॉल्यूम ग्रोथ बढ़ाना एक महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है।
इससे पहले जून 2026 में भी भारतीय फार्मा बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया था। PharmaTrac के आंकड़ों के अनुसार, जून में बाजार की वैल्यू ग्रोथ 13.3 प्रतिशत रही थी, जबकि यूनिट बिक्री में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
क्रॉनिक थेरेपी से मिल रहा मजबूत सपोर्ट
भारतीय फार्मा बाजार में क्रॉनिक थेरेपी से जुड़े सेगमेंट लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। जून के आंकड़ों में कार्डियक और एंटी-डायबिटिक थेरेपी में मजबूत वैल्यू ग्रोथ देखने को मिली थी। इससे संकेत मिलता है कि डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों से जुड़ी दवाओं की मांग बाजार की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
PharmaTrac ने 2026 के लिए भारतीय फार्मा बाजार की ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाकर 11.3 प्रतिशत किया था। बाजार में क्रॉनिक थेरेपी, न्यूट्रिशनल्स और अन्य तेजी से बढ़ते सेगमेंट को प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर माना जा रहा है।



