चीन को लेकर केंद्र सरकार पर जयराम रमेश का बड़ा हमला, बिजली परियोजनाओं के फैसले पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर चीन को लेकर नरम रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए बिजली परियोजनाओं से जुड़े एक फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां चीन के प्रति “कैलिब्रेटेड कैपिट्यूलेशन (सोची-समझी रियायत)” को दर्शाती हैं।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि केंद्र सरकार ने भारत में विनिर्माण इकाइयों वाली चार चीनी-लिंक्ड पावर उपकरण कंपनियों को कुछ सरकारी बिजली परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देने की दिशा में कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत-चीन सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अब भी बने हुए हैं।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है, जिससे विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सरकार की नीतियां चीन के प्रति रियायत देने वाली प्रतीत होती हैं।

जयराम रमेश ने अपने बयान में अरुणाचल प्रदेश, ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की जलविद्युत परियोजनाओं और पूर्वी लद्दाख की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इन मुद्दों पर चीन का रवैया नहीं बदला है और भारत की सुरक्षा तथा जल हितों से जुड़े प्रश्न अब भी गंभीर बने हुए हैं।

उन्होंने वर्ष 2020 की गलवान घाटी की घटना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस समय दिए गए बयान की भी आलोचना की। साथ ही उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पाकिस्तान के समर्थन में चीन की भूमिका को लेकर भी कई तथ्य सामने आए हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार की नीतियों में बदलाव नहीं दिख रहा है।

जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने जनवरी में कुछ सरकारी बिजली परियोजनाओं के लिए निविदा नियमों में छूट देने का प्रस्ताव रखा था, जिससे भारत में निर्माण इकाइयों वाली कुछ चीनी-लिंक्ड कंपनियां भी बोली प्रक्रिया में शामिल हो सकें।

हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से जयराम रमेश के इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष आना बाकी है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

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