नई दिल्ली/लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित दान घोटाले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मामले में बड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि जांच में किसी भी बड़े व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों या अधिकारियों को निशाना बनाकर मामले को खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
केजरीवाल ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार सभी लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इस्तीफे पर उठाए सवाल
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा द्वारा नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दिए गए इस्तीफों पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने कहा कि केवल इस्तीफा देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
योगी सरकार को दी नसीहत
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेते हुए केजरीवाल ने कहा कि सरकार को मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए और किसी भी दोषी को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर यदि किसी ने श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है तो उसे कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
अयोध्या के पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक पवन पांडेय ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर के लिए प्राप्त दान राशि में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता हुई है। आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।
इसके बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव सहित कई लोगों को नामजद किया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष तय होगा।





