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MP UCC: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की ओर बढ़े कदम, मुख्यमंत्री को सौंपी गई फाइनल रिपोर्ट; ST वर्ग को बाहर रखने की सिफारिश

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भोपाल:

उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश भी देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में यूसीसी के मसौदे को तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी अंतिम प्रतिवेदन (फाइनल रिपोर्ट) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी है। समिति द्वारा दी गई इस विस्तृत रिपोर्ट के बाद अब प्रदेश में कानून बनाने की प्रक्रिया को जल्द ही आगे बढ़ाया जा सकता है।

3 खंडों की विस्तृत रिपोर्ट: इन मुद्दों पर रहेगा फोकस

उच्च स्तरीय समिति द्वारा तैयार की गई यह ऐतिहासिक रिपोर्ट कुल तीन खंडों (Volumes) में विभाजित है। इस कानून के लागू होने के बाद सभी धर्मों के नागरिकों के लिए सामाजिक और पारिवारिक नियमों में एकरूपता आएगी। रिपोर्ट में मुख्य रूप से निम्नलिखित संवेदनशील विषयों को शामिल किया गया है:

  • विवाह और तलाक: शादी की उम्र, पंजीकरण और तलाक की प्रक्रियाओं को सभी समुदायों के लिए एक समान और सरल बनाना।
  • उत्तराधिकार : पैतृक और अर्जित संपत्ति में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित करना।
  • लिव-इन संबंध : लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा से जुड़े कड़े दिशा-निर्देश।

अनुसूचित जनजाति (ST) को दायरे से बाहर रखने की बड़ी सिफारिश

इस रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक बात अनुसूचित जनजातियों से जुड़ी है। मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी की बड़ी संख्या और उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक व पारंपरिक पहचान को ध्यान में रखते हुए:

समिति ने अपनी सिफारिशों में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को इस समान नागरिक संहिता के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिफारिश आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों और रूढ़िगत कानूनों को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है, ताकि उनकी अनूठी परंपराओं पर कोई आंच न आए।

आगे क्या होगा?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब सरकार इसके कानूनी पहलुओं और व्यावहारिकताओं की समीक्षा करेगी। इसके बाद इस मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और फिर विधानसभा के पटल पर विधेयक (Bill) के रूप में पेश किया जाएगा।

मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य की कानूनी और सामाजिक व्यवस्था में एक युगांतकारी बदलाव ला सकता है। आदिवासियों को इससे बाहर रखकर सरकार ने एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास किया है, जिससे आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बहस भी गरमाने की उम्मीद है।

मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

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