रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड के बाद अब छत्तीसगढ़ भी इस महत्वपूर्ण कानून को लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की योजना आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने की है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित विधेयक का मसौदा लगभग तैयार है और इसे विधिक विशेषज्ञों की राय के आधार पर अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को धर्म, जाति और समुदाय से ऊपर उठकर एक समान कानूनी अधिकार प्रदान करना है, ताकि विवाह, तलाक, गोद लेने, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे पारिवारिक मामलों में सभी के लिए एक समान कानून लागू हो सके।
राज्य सरकार का मानना है कि यूसीसी लागू होने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी। साथ ही महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों को और अधिक मजबूती मिलेगी। सरकार का यह भी कहना है कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है और उसी दिशा में यह पहल की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, विधेयक को लेकर विभिन्न विभागों, विधि विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। सरकार चाहती है कि कानून ऐसा हो जो संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होने के साथ-साथ राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का भी ध्यान रखे।
हालांकि, यूसीसी को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस विषय पर सभी वर्गों से व्यापक संवाद और चर्चा आवश्यक है। उनका मानना है कि किसी भी बड़े कानूनी बदलाव से पहले सभी समुदायों की राय को महत्व दिया जाना चाहिए।
यदि शीतकालीन सत्र में यह विधेयक विधानसभा से पारित हो जाता है, तो छत्तीसगढ़ उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर चर्चाएं और तेज होने की संभावना है।





