नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन लगातार 34वें दिन भी जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पहले की तरह डटे हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। इस बीच आंदोलन को लेकर नया मोड़ तब आया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने का ऐलान किया।
दिपके ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया, जिसे किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित ज्यादती के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तो इस मामले को अदालत में चुनौती दी जाएगी।
‘लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई है यह आंदोलन’
अभिजीत दिपके ने कहा कि यह आंदोलन केवल कुछ मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पिछले 34 दिनों से आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और प्रदर्शनकारी संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं।उन्होंने दोहराया कि जब तक सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तब तक धरना जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक के अनशन ने बढ़ाई चिंता
आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन भी लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार उनका अनशन 26वें दिन में पहुंच चुका है। उनकी गिरती सेहत को लेकर आंदोलन से जुड़े लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।अभिजीत दिपके ने कहा कि सभी लोग सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की। दिपके ने कहा कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि जनहित का आंदोलन है और यह उनकी जान जोखिम में डालकरआंदोलन के 34 दिन पूरे होने के बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावना पर सभी की निगाहें टिकी हैं। वहीं, कथित लाठीचार्ज के मामले में कानूनी कार्रवाई नहीं चलाया जाना चाहिए।
सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
आंदोलन के 34 दिन पूरे होने के बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावना पर सभी की निगाहें टिकी हैं। वहीं, कथित लाठीचार्ज के मामले में कानूनी कार्रवाई और सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी स्थिति लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।





