मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर लगातार चौथे कारोबारी दिन भी जारी रहा। गुरुवार को घरेलू बाजार की शुरुआत कमजोर रही और बीएसई सेंसेक्स 300 अंक से अधिक टूटकर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का देखने को मिला। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर (Red Sea) में बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार को लेकर निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया। इन घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से करीब 300 अंक से अधिक नीचे खुला, जबकि निफ्टी 50 भी शुरुआती कारोबार में तेज दबाव में रहा। बैंकिंग, आईटी, ऑटो और मेटल सेक्टर के अधिकांश शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी तरह की बाधा आती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई, आयात बिल और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जिसका असर शेयर बाजार पर पड़ सकता है।
हालांकि, एशियाई बाजारों में कुछ मजबूती देखने को मिली, लेकिन भारतीय बाजार पर वैश्विक जोखिम, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बढ़ती अनिश्चितता का दबाव बना रहा। निवेशक फिलहाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों की दिशा पर नजर बनाए हुए हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सोच-समझकर निवेश करने और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।





