नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और लगातार बिगड़ते हालात के बीच कांग्रेस सांसद और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने शांति और कूटनीति के पक्ष में मजबूत अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान केवल बातचीत और संवाद के जरिए ही संभव है, जबकि सैन्य कार्रवाई अक्सर स्थिति को और अधिक जटिल बना देती है।
मीडिया से बातचीत के दौरान थरूर ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ता है।
- “शांति एक प्रक्रिया है, सिर्फ युद्ध का अंत नहीं”
शशि थरूर ने कहा कि शांति केवल संघर्ष की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह विश्वास, सहयोग और निरंतर संवाद पर आधारित एक प्रक्रिया है। उनके अनुसार, यदि संबंधित पक्ष बातचीत की मेज पर लौटते हैं, तो तनाव कम करने और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस प्रगति संभव है।
- वैश्विक असर पर जताई चिंता
पूर्व राजनयिक ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया का संकट केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया पहले से ही कई भू-राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में नया तनाव अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।
- मानवीय संकट पर भी फोकस
थरूर ने संघर्षों के मानवीय पहलू पर जोर देते हुए कहा कि युद्ध का सबसे बड़ा बोझ आम लोगों को उठाना पड़ता है। विस्थापन, जीवन की असुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी किसी भी युद्ध के सबसे गंभीर परिणाम होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
- कूटनीति ही आगे का रास्ता
अपने बयान में शशि थरूर ने कहा कि इतिहास इस बात का प्रमाण है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद अंततः बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही सुलझे हैं। इसलिए सभी पक्षों को टकराव के बजाय संवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि थरूर का यह बयान संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें किसी पक्ष का समर्थन किए बिना शांति और स्थिरता पर जोर दिया गया है।

