नई दिल्ली। देश में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जो लोग बार-बार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों का उल्लंघन करते हैं, उन्हें पहले लिखित नोटिस दिया जाए। नोटिस के बावजूद नियमों का पालन नहीं करने पर उनके पानी और बिजली के कनेक्शन अस्थायी रूप से काटे जा सकते हैं।
पहले मिलेगा लिखित नोटिस
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, कचरा अलग करने, उसे सही तरीके से रखने और निर्धारित स्थान पर सौंपने जैसे नियमों का लगातार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पहले लिखित नोटिस जारी किया जाएगा। यदि नोटिस के बाद भी नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के पानी और बिजली कनेक्शन को अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है।
हालांकि, नियमों का अनुपालन किए जाने का प्रमाण प्रस्तुत करने के बाद कनेक्शन दोबारा बहाल किया जाएगा। कोर्ट के इस निर्देश का उद्देश्य लोगों को कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करने के लिए जिम्मेदार बनाना है।
स्कूल-कॉलेजों में भी बढ़ेगी जागरूकता
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों को भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को शिक्षा का हिस्सा बनाने और छात्रों को इसके प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि कचरा प्रबंधन केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाकर भविष्य में बेहतर कचरा प्रबंधन व्यवस्था तैयार की जा सकती है।
नियमों के पालन पर जोर
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख से साफ है कि ठोस कचरा प्रबंधन के नियमों की अनदेखी अब गंभीरता से ली जाएगी। नोटिस के बाद भी लगातार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है, जबकि नियमों का पालन करने पर सुविधाएं बहाल करने का प्रावधान रखा गया है।



