रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने श्रमिकों के लिए संचालित योजनाओं को सुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार से जोड़ते हुए उन्हें अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने का प्रयास किया है।
श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रम विभाग ने श्रमिकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ तेज़ी और सरलता से पहुंचाने के लिए कई प्रशासनिक सुधार किए हैं। विभाग का दावा है कि इन प्रयासों से श्रमिकों के पंजीयन, सहायता वितरण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गति आई है।
तकनीक के जरिए आसान हुई योजनाओं तक पहुंच
सरकार के अनुसार, श्रम विभाग ने डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देते हुए योजनाओं की प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल बनाया है। इससे श्रमिकों को पंजीकरण, आवेदन और सहायता प्राप्त करने में सुविधा मिल रही है। विभाग का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ बिना अनावश्यक देरी के पहुंचाना है।
सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा पर विशेष जोर
राज्य सरकार का कहना है कि श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार किया गया है। निर्माण श्रमिकों सहित असंगठित क्षेत्र के कामगारों को भी योजनाओं से जोड़ने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।
सरकार का दावा, श्रमिक हित सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार का कहना है कि पिछले ढाई वर्षों में श्रमिक कल्याण को केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे बेहतर प्रशासन और जवाबदेही से जोड़ा गया है। विभाग का लक्ष्य है कि राज्य का प्रत्येक पात्र श्रमिक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर प्राप्त कर सके और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आए।



