नई दिल्ली: NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में बैठे प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपनी 26 दिनों से चली आ रही भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। शुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन खत्म करने का आधिकारिक ऐलान किया।
यह निर्णय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में लिया गया। मंत्रियों ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त करवाया।
सरकार का 3 प्रमुख मांगों पर ‘ग्रीन सिग्नल’सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि मौखिक आश्वासनों के बजाय उन्होंने औपचारिक लिखित दस्तावेज पर जोर दिया, जिसके कारण अनशन खत्म होने में दो दिन का अतिरिक्त समय लगा। सरकार की ओर से स्वीकार की गई तीन मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
छात्रों पर कोई FIR नहीं: जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों/युवाओं और 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च में भाग लेने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मृतकों के परिजनों को मुआवजा: NEET पेपर लीक मामले के तनाव के कारण जिन छात्रों ने अपनी जान गंवाई है, उनके परिवारों को सरकार उचित आर्थिक सहायता प्रदान करेगी।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर क्या बोले वांगचुक?
संसद में गहन चर्चा और प्रणालीगत सुधार: परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने के लिए संसद में विस्तृत बहस होगी और परीक्षा प्रणाली की औपचारिक विधायी समीक्षा की जाएगी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर बात करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि हालांकि सरकार ने इसके लिए कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं की है, लेकिन उन्होंने दीर्घकालिक संघर्ष और छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
सोनम वांगचुक का वीडियो संदेश:
मेरे पास दो विकल्प थे—या तो मैं अनशन जारी रखता जिससे मेरी जान को खतरा हो सकता था, या फिर इस संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए जीवित रहता। अगर शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो इससे छात्रों का नुकसान नहीं होगा, बल्कि नैतिकता के आधार पर सरकार का ही नुकसान होगा। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए था, लेकिन हमने छात्रों के हित में इस लिखित आश्वासन को स्वीकार किया है।
व्यापक संसदीय समर्थन से सुलझा गतिरोध
इस आंदोलन को देशभर से भारी समर्थन मिला। सोनम वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या पत्र लिखकर समर्थन दिया और भूख हड़ताल समाप्त करने का अनुरोध किया। सांसदों ने यह आश्वासन दिया है कि वे आने वाले सत्र में नीट परीक्षा में गड़बड़ी और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे।
सरकार द्वारा मिले इस लिखित पत्र के बाद छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने राहत की सांस ली है, वहीं सोनम वांगचुक ने छात्रों से शांति बनाए रखने और भविष्य के सुधारों पर नजर रखने की अपील की है।





