नई दिल्ली:
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का प्रसिद्ध जंतर-मंतर इन दिनों सिर्फ एक धरना-स्थल नहीं, बल्कि युवाओं के हौसले, एकजुटता और आक्रोश का एक जीवंत कैनवास बन चुका है। NEET पेपर लीक के खिलाफ पिछले एक महीने से चल रहा यह आंदोलन हाल के वर्षों में देश की राजधानी में देखा गया सबसे बड़ा विरोध-प्रदर्शन बन गया है।
तकरीबन एक महीने से जारी इस प्रदर्शन का केंद्र केवल मंच तक सीमित नहीं है, बल्कि जंतर-मंतर के आसपास के कई किलोमीटर के दायरे में अब छोटे-छोटे ‘कई जंतर-मंतर’ बनते दिख रहे हैं। हर नुक्कड़, हर सड़क, हर चौराहा और दीवार इस व्यवस्था विरोधी आंदोलन की गवाह बन चुकी है।
27वें दिन टूटा सोनम वांगचुक का अनशन, पर नहीं थमा जनसैलाब
इस ऐतिहासिक आंदोलन का मुख्य केंद्र बिंदु प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की 27 दिनों तक चली लंबी भूख हड़ताल रही। 21 दिनों तक मंच पर डटे रहने के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनका संकल्प कम नहीं हुआ। अस्पताल जाने के बावजूद आंदोलन की धार कुंद नहीं हुई और आखिरकार दो केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।
सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने और कद्दावर राजनीतिक हस्तियों के आने-जाने के बावजूद प्रदर्शनस्थल पर छात्रों का जोश कम नहीं हुआ है। मंच से भाषण, नारेबाजी और मांगों का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
जब विरोध बना एकजुटता और सेवा की मिसाल
जंतर-मंतर से आ रही तस्वीरें सिर्फ गुस्से और नारों की नहीं हैं, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं और नागरिक अनुशासन का एक अनोखा उदाहरण भी पेश कर रही हैं:
- सेवा करते हाथ: तपती गर्मी और भारी भीड़ के बीच लगातार खाने के पैकेट बांटे जा रहे हैं।
- तैयार कंधे: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए युवा फर्स्ट-एड किट (प्राथमिक चिकित्सा) अपने कंधों पर टांगे मुस्तैद दिखते हैं।
- प्लास्टिक और जूट के पंखे: हजारों चेहरों का पसीना पोंछने के लिए हाथ से बने प्लास्टिक और जूट के पंखे हवा में तैरते नजर आते हैं।
- स्वच्छता का संदेश: इतनी बड़ी भीड़ होने के बावजूद छात्र खुद झाड़ू उठाकर सड़क पर गिरा कचरा समेटते दिख रहे हैं।
हर दीवार पर लिखी है ‘क्रांति की कहानी’
जंतर-मंतर का पूरा इलाका जनसैलाब से अटा पड़ा है, जहाँ विरोध जताने के अनूठे और कलात्मक तरीके अपनाए जा रहे हैं:
आंदोलन के अलग-अलग रंग:
कोई बुलंद नारों से माहौल में ऊर्जा भर रहा है, तो कोई नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से व्यवस्था को आईना दिखा रहा है। कहीं क्रांति के गीत गाकर हौसला बढ़ाया जा रहा है, तो कहीं छात्र सड़कों और दीवारों को कैनवास बनाकर अपनी पीड़ा को रंगों से उकेर रहे हैं।
सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहे हैं वे अकेले छात्र, जो बिना किसी भीड़ के, हाथों में सिर्फ एक पोस्टर और सीने में बुलंद हौसला लिए पूरी व्यवस्था को सवालों के कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। जंतर-मंतर की दीवारों से लेकर हर नुक्कड़ आज एक ही स्वर में कह रहा है— न्याय मिलने तक यह संघर्ष थमेगा नहीं!





