संसद के मॉनसून सत्र के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव की राजनीतिक सक्रियता लगातार चर्चा में है। बुधवार को उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय से मुलाकात की, जिसके बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों और विपक्षी एकजुटता के संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
अखिलेश यादव इन दिनों संसद के भीतर छात्रों के मुद्दों समेत कई अहम विषयों पर केंद्र सरकार को घेरते हुए नजर आ रहे हैं। साथ ही वे विपक्षी दलों के नेताओं से लगातार मुलाकात कर रहे हैं, जिससे विपक्षी एकता को मजबूत करने की कोशिशों के संकेत मिल रहे हैं।
सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीर
अखिलेश यादव ने सौगत रॉय के साथ मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, “तजुर्बों से मुलाकात।”
सौगत रॉय पश्चिम बंगाल के दमदम लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और लंबे समय से टीएमसी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।
कांग्रेस की बढ़ सकती है चिंता
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि समाजवादी पार्टी और टीएमसी के रिश्ते और मजबूत होते हैं, तो इसका असर कांग्रेस की रणनीति पर भी पड़ सकता है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और टीएमसी अलग-अलग चुनाव लड़ चुकी हैं। ऐसे में विपक्षी दलों के बदलते समीकरण कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकते हैं।
गठबंधन पर अभी सस्पेंस
हालांकि, अखिलेश यादव ने अभी तक 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस या अन्य दलों के साथ गठबंधन को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता और सहारनपुर सांसद इमरान मसूद पहले ही कह चुके हैं कि उनकी पार्टी प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रही है।
इससे पहले भी अखिलेश यादव ने इंडिया (INDIA) गठबंधन की बैठक के दौरान कहा था कि लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन था, जबकि विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं और उस पर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चाएं
अखिलेश यादव की लगातार बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और विपक्षी नेताओं से मुलाकातों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि, फिलहाल किसी नए चुनावी गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में विपक्ष की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।





