नई दिल्ली। महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और WFI के पूर्व सचिव विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया है। करीब तीन साल तक चले इस मामले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फैसला सुनाया।फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह के वकील ऋषभ भाटी ने दावा किया कि बचाव पक्ष के लिए सबसे बड़ा आधार महिला पहलवानों और जांच प्रक्रिया के दौरान दिए गए बयानों में सामने आए कथित विरोधाभास रहे। उन्होंने कहा कि अदालत में आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।
बचाव पक्ष का दावा- बयानों में अंतर से कमजोर हुआ मामला
अधिवक्ता ऋषभ भाटी के अनुसार, शुरुआत से ही अलग-अलग स्तरों पर दिए गए बयानों में अंतर दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि ओवरसाइट कमेटी, पुलिस जांच और अदालत में दर्ज बयानों में कई महत्वपूर्ण अंतर थे।बचाव पक्ष ने अदालत के सामने दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश किए और जिरह के दौरान कथित विरोधाभासों को प्रमुखता से उठाया। वकील का कहना है कि कई मामलों में कथित घटनाओं के समय, स्थान और परिस्थितियों को लेकर अंतर सामने आया, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हुआ।
ED नहीं, कोर्ट में हुई लंबी कानूनी लड़ाई
इस मामले में कुल 127 सुनवाई हुईं और 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें 2 जुलाई 2026 को पूरी हुई थीं, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे। 10 मई 2024 को अदालत ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय किए थे, जिसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई थी।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला जनवरी 2023 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया था। उस समय बृजभूषण भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष थे।पहलवानों ने उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ताओं में ओलंपिक पदक विजेता पहलवान भी शामिल थीं। शुरुआत में मामला दर्ज नहीं होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से अप्रैल 2023 में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि, बाद में नाबालिग पहलवान से जुड़ी शिकायत वापस ले ली गई थी।
बृजभूषण बोले- मैंने खुद को कभी दोषी नहीं माना
अदालत से बाहर निकलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले से ही खुद को निर्दोष माना है। उन्होंने कहा कि अगर कोई आरोप साबित होता तो वह सजा स्वीकार करने के लिए तैयार थे। उन्होंने फैसले को अपने लिए राहत का दिन बताया।उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले ने उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन को काफी प्रभावित किया, लेकिन उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा था।
पहलवानों ने जताई निराशा, अपील की तैयारी
वहीं, महिला पहलवानों ने अदालत के फैसले पर निराशा जताई है। पहलवानों का कहना है कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और वे इस फैसले के खिलाफ आगे कानूनी रास्ता अपनाएंगे।विनेश फोगाट ने कहा कि प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ आवाज उठाना आसान नहीं था और वे न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेंगी। वहीं, बजरंग पूनिया ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि किन आधारों पर बरी किया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं सामने
कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कुछ नेताओं ने फैसले पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए और आगे की कानूनी प्रक्रिया का इंतजार करना चाहिए।
आगे क्या होगा?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, बरी होने का मतलब यह है कि अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर पाया। हालांकि, शिकायतकर्ता पक्ष के पास फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने का विकल्प मौजूद है।महिला पहलवानों से जुड़े इस मामले ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय खेल जगत और राजनीति में काफी बहस पैदा की थी। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या इस फैसले के खिलाफ आगे कोई कानूनी चुनौती दी जाती है या नहीं।





