रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कारोबारी और कथित तांत्रिक केके श्रीवास्तव की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कई अहम खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, केके श्रीवास्तव के नाम से जुड़ी पांच कंपनियों के दस्तावेजों और अस्तित्व को लेकर गंभीर सवाल मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि इन कंपनियों के जरिए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन किए गए और अब करीब 300 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है।
ED की जांच में सामने आया है कि जिन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर कारोबार के लिए किया जा रहा था, उनके दस्तावेजों में दर्ज पते संदिग्ध पाए गए। जांच टीम द्वारा मौके पर सत्यापन करने पर कुछ कंपनियों का वास्तविक संचालन नहीं मिला। इसके अलावा कंपनियां स्थापित करने में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
फर्जी दस्तावेजों और शेल कंपनियों के जरिए लेनदेन का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, जांच के दौरान कई ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कथित रूप से पेपर कंपनियों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पैसों का लेनदेन किया गया। एजेंसी अब इन कंपनियों के बैंक खातों, वित्तीय रिकॉर्ड और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि केके श्रीवास्तव से जुड़े नेटवर्क के जरिए विदेशों में भी धन भेजा गया। प्रारंभिक जांच में दुबई, हांगकांग, चीन और सिंगापुर जैसे देशों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। ED इन विदेशी ट्रांजेक्शन के स्रोत और उद्देश्य की जांच कर रही है।
300 करोड़ रुपये के लेनदेन पर ED की नजर
ED को केके श्रीवास्तव और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी कथित शेल कंपनियों की जानकारी मिलने की बात कही जा रही है। इन कंपनियों के बैंक खातों में हुए करीब 300 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और किन उद्देश्यों के लिए इसका इस्तेमाल किया गया।
जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप
ED अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पक्ष जांच में पूरी तरह सहयोग नहीं कर रहा है। एजेंसी कई सवालों के जवाब तलाश रही है, जिसमें कथित धोखाधड़ी की रकम उनके खातों तक पहुंचने का तरीका, पीड़ित को लौटाई गई रकम का स्रोत और अन्य वित्तीय गतिविधियां शामिल हैं।
केके श्रीवास्तव को 30 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें 7 अगस्त तक ED की रिमांड पर भेजा है। एजेंसी उनसे लगातार पूछताछ कर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला दिल्ली के कारोबारी अशोक रावत की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, केके श्रीवास्तव ने कथित तौर पर स्मार्ट सिटी और NRDA से जुड़े करीब 500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट दिलाने के नाम पर उनसे 15 करोड़ रुपये लिए थे।
आरोप है कि प्रोजेक्ट नहीं मिलने की स्थिति में रकम वापस करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में पैसे वापस नहीं किए गए। इसके बाद कारोबारी ने रायपुर के तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया।
आगे की जांच जारी
फिलहाल ED इस मामले में वित्तीय लेनदेन, कंपनियों के दस्तावेज, बैंक खातों और विदेशों में हुए संभावित ट्रांसफर की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।





